रामगंगा बनी मौत की नदी! एक महीने में तीसरी बार गोवंशीय पशुओं के शव बरामद, खेतों में भी मिले अवशेष…
सत्यम गौड़। फरीदपुर
रामगंगा नदी में गोवंशीय पशुओं के शव मिलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। फतेहगंज पूर्वी क्षेत्र के गांव खनीन नवादा के पास सोमवार को रामगंगा नदी में चार गोवंशीय पशुओं के शव उतराते हुए मिले, जबकि उनके अवशेष पास के खेतों में भी बिखरे पाए गए। यह एक माह के भीतर तीसरी बार है जब नदी में मृत पशुओं के शव मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
ग्रामीणों के अनुसार इससे पहले 20 जनवरी को रामगंगा नदी से आठ गोवंशीय पशुओं के शव मिले थे, जबकि 28 जनवरी को छह शव बरामद किए गए थे। लगातार हो रही घटनाओं के बावजूद प्रशासन अब तक यह पता नहीं लगा सका है कि मृत पशु नदी में कहां से और कैसे फेंके जा रहे हैं।
सोमवार को शव मिलने की सूचना पर ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश फैल गया। लोगों ने मौके पर पहुंचकर प्रशासन की लापरवाही पर सवाल उठाए और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल किए। ग्रामीणों का आरोप है कि फरीदपुर थाना क्षेत्र में स्थित एक गोशाला से मृत गोवंशीय पशुओं के अवशेष रामगंगा नदी में फेंके जा रहे हैं। हालांकि प्रशासन ने अब तक इस आरोप की पुष्टि नहीं की है।
सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पशुओं के शवों का पोस्टमार्टम कराकर दफन कराया गया, लेकिन शवों के स्रोत को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि मामले को हल्के में लिया जा रहा है, जबकि यह न सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है, बल्कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। रामगंगा नदी में बार-बार मिल रहे गोवंशीय पशुओं के शव प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहे हैं।







