होली पर हर्बल खुशबू की बहार: महिलाओं ने रचा आत्मनिर्भरता का नया रंग…

सक्ति, 27 फरवरी 2026।
इस बार होली पर रंगों के साथ एक खास प्राकृतिक खुशबू भी जिले में बिखर रही है। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत विकासखंड सक्ती के ग्राम पलाड़ी कला की राधा कृष्ण स्व-सहायता समूह तथा ग्राम जर्वे की सर्वमंगला स्व-सहायता समूह की महिलाएं पूरी तरह प्राकृतिक सामग्री से इको-फ्रेंडली हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं, जो पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण की सुंदर मिसाल बनकर उभर रहा है।
रासायनिक रंगों के दुष्प्रभावों से बचाव और सुरक्षित होली के उद्देश्य से समूह की महिलाएं चुकंदर से गुलाबी, हल्दी से पीला और पालक से हरा रंग निकाल रही हैं। इन रंगों में लेमन ग्रास ऑयल की प्राकृतिक सुगंध मिलाकर आकर्षक पैकेजिंग में हर्बल गुलाल तैयार किया जा रहा है। त्वचा के लिए सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल यह गुलाल बाजार में हाथों-हाथ बिक रहा है।
दो क्विंटल गुलाल की रिकॉर्ड बिक्री

प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग दो क्विंटल हर्बल गुलाल का निर्माण किया जा चुका है, जिसकी बिक्री तेज़ी से हो रही है। जिला प्रशासन द्वारा व्यापक प्रचार-प्रसार, स्टॉल व्यवस्था और सी.एल.एफ. बैठकों के माध्यम से विक्रय सुनिश्चित किया गया है, जिससे उत्पाद को बेहतर बाजार उपलब्ध हुआ है।
कलेक्टर अमृत विकास तोपनो के निर्देशन में और जिला पंचायत सीईओ वासु जैन के मार्गदर्शन से समूह की महिलाओं को विपणन में विशेष सहयोग मिला है।
“अब त्यौहार बने आय का जरिया”
समूह की सदस्य पुष्पा दीदी बताती हैं,
“हर्बल गुलाल पूरी तरह सुरक्षित है। इसे स्थानीय भाजी, चुकंदर और हल्दी से तैयार कर आकर्षक पैकिंग में अच्छे दाम पर बेचा जा रहा है। इससे हमारी आय बढ़ी है। अब राखी, गुलाल और दिवाली गिफ्ट हैम्पर जैसे त्यौहारी उत्पाद हमारे लिए सतत आय का जरिया बन गए हैं।”
उन्होंने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
सक्ती जिलेवासी ग्राम पलाड़ी कला एवं ग्राम जर्वे स्थित समूहों अथवा जिला पंचायत कार्यालय से संपर्क कर आकर्षक और सुरक्षित हर्बल गुलाल खरीद सकते हैं।
इस होली, प्राकृतिक रंगों के साथ खुशियों को दें हरित स्पर्श।







