पेट्रोल-डीजल पर बड़ा खेल! मोदी सरकार आई एक्शन मोड में, आखिर क्यों बढ़ रही कमी की चर्चा?
आवाम की आवाज़ न्यूज़// भुनेश्वर निराला
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में कई राज्यों से ईंधन की कमी और पेट्रोल पंपों पर दबाव की खबरें सामने आने लगीं। सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की अफवाहें फैलने लगीं कि आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत हो सकती है। लेकिन अब केंद्र सरकार ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है और पूरे मामले को लेकर बड़ा खुलासा किया है।
केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कोई कमी नहीं है। भारत के पास जरूरत से ज्यादा ईंधन उपलब्ध है और सप्लाई पूरी तरह सामान्य है। सरकार के मुताबिक देश की 22 रिफाइनरियों की कुल क्षमता सालाना 258 मिलियन टन से ज्यादा है, जबकि देश की कुल खपत इससे काफी कम है। इतना ही नहीं, भारत दुनियाभर के कई देशों को बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात भी कर रहा है।
सरकार ने बताया कि असली समस्या कहीं और है। दरअसल कुछ उद्योग और बड़े उपभोक्ता कम कीमत का फायदा उठाने के लिए औद्योगिक सप्लाई चैनल छोड़कर सीधे पेट्रोल पंपों से डीजल खरीद रहे हैं। इससे अचानक कई पेट्रोल पंपों पर दबाव बढ़ गया और लोगों को ऐसा लगने लगा कि ईंधन की कमी हो गई है।
सरकार ने इस पूरे मामले को “आर्बिट्राज गेम” बताया है। यानी जहां सामान सस्ता मिल रहा है, वहां से ज्यादा मात्रा में खरीदकर फायदा उठाना। इसी खेल की वजह से कुछ इलाकों में सामान्य से ज्यादा डिमांड दिखाई दे रही है।
सूत्रों के मुताबिक इस स्थिति का असर निजी तेल कंपनियों पर भी पड़ा है। उनकी बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि सरकारी कंपनियों पर दबाव तेजी से बढ़ा है। केंद्र सरकार अब इस मामले को लेकर पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी लगातार तेल कंपनियों, राज्य सरकारों और अधिकारियों के संपर्क में हैं। राज्यों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि जमाखोरी, कालाबाजारी और अवैध भंडारण करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए। कई जगह विशेष टीमों के गठन की तैयारी भी शुरू हो चुकी है।
सबसे बड़ी बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ने के बावजूद सरकारी तेल कंपनियां पूरा बोझ जनता पर नहीं डाल रही हैं। सरकार के अनुसार पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस की बिक्री में सरकारी कंपनियां हर दिन सैकड़ों करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं। इसके बावजूद सप्लाई बनाए रखने की कोशिश जारी है।
हालांकि आम जनता की चिंता अभी भी खत्म नहीं हुई है। मई महीने में कई बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ चुके हैं, जिससे लोगों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है। ट्रांसपोर्ट से लेकर रोजमर्रा के सामान तक महंगाई बढ़ने लगी है।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत से ज्यादा ईंधन खरीदकर स्टॉक न करें। अधिकारियों का कहना है कि देश में पर्याप्त भंडार मौजूद है और हालात पूरी तरह नियंत्रण में हैं।
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों से जनता को राहत मिलेगी या फिर महंगाई का दबाव और बढ़ेगा?









