काम शून्य… भुगतान पूरा! सारंगढ़ की पंचायत में डेढ़ लाख का खेल? बिना खुदे बोरवेल पर उठे बड़े सवाल | पार्ट-01…
सारंगढ़। जनपद पंचायत क्षेत्र की एक ग्राम पंचायत से सामने आई वित्तीय अनियमितता की आशंका ने स्थानीय स्तर पर हलचल मचा दी है। मामला उस बोरवेल कार्य से जुड़ा बताया जा रहा है, जिस पर ग्रामीणों का दावा है कि जमीन पर कोई काम दिखाई नहीं देता, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में कथित तौर पर करीब 1.50 लाख रुपये का भुगतान दर्ज हो चुका है। इस दावे के सामने आने के बाद पंचायत व्यवस्था और भुगतान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस स्थान पर बोरवेल खुदाई होनी थी, वहां आज भी काम के कोई स्पष्ट निशान नहीं हैं। इसके बावजूद संबंधित फर्म के नाम से भुगतान होने की चर्चा ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है। लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में कार्य पूरा नहीं हुआ, तो सरकारी राशि आखिर किस आधार पर जारी की गई?
सवालों के घेरे में भुगतान प्रक्रिया
सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी विकास कार्य का भुगतान आमतौर पर कार्य पूर्ण होने, भौतिक सत्यापन और आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया के बाद किया जाता है। ऐसे में यदि कार्य अधूरा या शुरू ही नहीं हुआ, तो भुगतान कैसे स्वीकृत हुआ? यही सवाल अब ग्रामीण खुलकर उठा रहे हैं।
सचिव के बयान ने बढ़ाई चर्चा
जब इस मामले में पंचायत सचिव से सवाल किए गए तो उन्होंने बताया कि कार्य जल्द पूरा करा दिया जाएगा। इस बयान के बाद विवाद और गहरा गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि काम अभी होना बाकी है, तो भुगतान पहले कैसे हो गया? यही बात पूरे मामले को संदेहास्पद बना रही है।
जनपद प्रशासन पर टिकी निगाहें
अब लोगों की निगाहें जनपद पंचायत और जिला प्रशासन पर हैं। ग्रामीण निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भुगतान नियमों के तहत हुआ या कहीं प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही अथवा अनियमितता हुई है। यदि जांच में गड़बड़ी सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी तेज हो गई है।
यह मामला फिलहाल कई सवाल छोड़ रहा है—क्या बिना काम भुगतान हुआ? यदि हुआ तो जिम्मेदार कौन? और क्या सरकारी धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले नियमों का पालन किया गया? इन सभी सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएंगे।















