खाकी पर सवाल: जांजगीर-चांपा में पुलिसकर्मियों पर रिश्वत मांगने के आरोप, जांच की मांग…
मनीराम आजाद
जांजगीर-चांपा, छत्तीसगढ़।
जिले में पुलिस व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है।
थाना शिवरीनारायण के अंतर्गत पुलिस सहायता केंद्र राहौद में पदस्थ कुछ पुलिस अधिकारियों पर रिश्वत मांगने के आरोप लगे हैं।
इस संबंध में एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
💰 ₹50,000 और शराब की मांग का आरोप
शिकायतकर्ता अमित कुमार खुंटे ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि उनके परिचित से जुड़े एक मामले में राहत देने और चालान प्रस्तुत करने के बदले कथित तौर पर ₹50,000 की राशि मांगी गई।
साथ ही, आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि शराब की कुछ बोतलों की मांग किए जाने का भी आरोप है।
⚠️ हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
🗣️ किस्तों में पैसे मांगने का दावा
शिकायत पत्र के अनुसार, कथित रूप से ₹30,000 और ₹20,000 की किस्तों में भुगतान करने पर कार्य शीघ्र करने की बात कही गई।
शिकायत में थाना प्रभारी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
⚠️ पुलिस अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
⚠️ दबाव बनाने का भी आरोप
शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि रिश्वत देने से इनकार करने पर कथित तौर पर दबाव बनाया गया।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
🎥 ऑडियो-वीडियो साक्ष्य होने का दावा
आवेदन में शिकायतकर्ता ने ऑडियो और वीडियो साक्ष्य होने का दावा किया है।
यदि ये साक्ष्य जांच में सही पाए जाते हैं, तो मामले में आगे की कार्रवाई हो सकती है।
❓ जांच के बाद ही साफ होगी स्थिति
इस पूरे मामले को लेकर आम लोगों के बीच चर्चा जरूर है, लेकिन सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
👮 एसपी से निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने पुलिस अधीक्षक से मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है।
⚖️ (महत्वपूर्ण डिस्क्लेमर)
यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित पुलिस अधिकारियों की भूमिका और आरोपों की सत्यता की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।
✅ यह वर्जन क्यों सेफ है:
सीधे आरोप नहीं, “आरोप/दावा/कथित” शब्द का उपयोग
दोनों पक्ष का जिक्र (भले बयान न आया हो)
जांच लंबित बताई
अंतिम निर्णय अथॉरिटी (पुलिस/जांच) पर छोड़ा











