तालाब गहरीकरण की आड़ में मुरूम का खेल! तहसील प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, जब्त दो चैन माउंटिंग वाहन रातों-रात गायब।…
रिपोर्टर _ दिलीप वर्मा
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सरपंच, सरपंच पति और सचिव की भूमिका पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने लगाया बिना पंचायत प्रस्ताव उत्खनन कराने का आरोप!
बलौदा बाजार/ रायपुर। बलौदाबाजार-भाटापारा जिले की सिमगा तहसील अंतर्गत ग्राम खिलोरा में तालाब गहरीकरण की आड़ में कथित रूप से मुरूम के व्यावसायिक उत्खनन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। डेढ़ माह से जारी उत्खनन को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। मामले में सरपंच, सरपंच पति एवं पंचायत सचिव की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। वहीं तहसील प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मौके पर खड़े दो चैन माउंटिंग वाहनों को जब्त किया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि जब्ती की कार्रवाई के कुछ घंटों बाद ही दोनों वाहन मौके से गायब कर दिए गए।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में विधिवत प्रस्ताव पारित किए बिना तालाब गहरीकरण के नाम पर उत्खनन की अनुमति लेने का प्रयास किया गया। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब को गहरीकरण के नाम पर असमतल तरीके से लगभग 16 फीट तक खोद दिया गया है, जिससे तालाब की मूल संरचना प्रभावित हुई है और आम लोगों तथा मवेशियों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है।
मौके का निरीक्षण करने पहुंचे छत्तीसगढ़ मीडिया एसोसिएशन के पत्रकारों की टीम ने उत्खनन स्थल की स्थिति देखकर आश्चर्य व्यक्त किया। टीम को रॉयल्टी और परिवहन संबंधी दस्तावेजों में भी कई विसंगतियां दिखाई दीं। ग्रामीणों का आरोप है कि दिन-रात मुरूम का दोहन कर व्यावसायिक रूप से परिवहन किया जा रहा है।
मामले में जिला खनिज विभाग के अधिकारी अवधेश बारिक से जानकारी लेने पर उन्होंने लगभग 18 हजार घनमीटर मुरूम उत्खनन की अनुमति होने की बात कही। वहीं गहराई की सीमा को लेकर उनका जवाब स्पष्ट नहीं था। उन्होंने जांच टीम भेजने का आश्वासन दिया था, लेकिन समाचार लिखे जाने तक न तो कोई जांच दल मौके पर पहुंचा और न ही अधिकारी द्वारा फोन रिसीव किया गया।
इधर पंचायत सचिव से प्रस्ताव संबंधी जानकारी लेने पहुंचे पत्रकारों के साथ सरपंच एवं सरपंच पति द्वारा कथित दुर्व्यवहार किए जाने की भी चर्चा है। वहीं पंचायत सचिव भी दस्तावेजी जानकारी देने से बचते नजर आए।
जैसे-जैसे मामला तूल पकड़ता गया, राजस्व विभाग ने कार्रवाई शुरू की। सूत्रों के अनुसार कार्रवाई की भनक लगते ही मुरूम परिवहन में लगे अधिकांश वाहन मौके से हटा दिए गए। बाद में तहसीलदार ने स्थल का निरीक्षण किया। उत्खनन की गहराई और स्थिति देखकर उन्होंने मौके पर खड़े दो चैन माउंटिंग वाहनों पर जब्ती की कार्रवाई करते हुए पंचनामा तैयार कराया तथा वाहनों पर आदेश की प्रति चस्पा कर दी, ताकि अगले दिन उन्हें थाना सुपुर्द किया जा सके।
लेकिन रात बीतने से पहले ही जब्त किए गए दोनों वाहन रहस्यमय परिस्थितियों में मौके से गायब हो गए। इससे प्रशासनिक कार्रवाई की गंभीरता और कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह शासकीय कार्रवाई में बाधा डालने का गंभीर मामला माना जा सकता है।
मामले में एक नया मोड़ तब आया जब जानकारी सामने आई कि सरपंच पति एवं उनके भाई पर एक युवक के साथ मारपीट करने का आरोप लगा है। पीड़ित द्वारा इस संबंध में हथबंद थाना में शिकायत दर्ज कराई गई है।
अब ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर पंचायत प्रस्ताव, रॉयल्टी, उत्खनन की मात्रा, गहराई, परिवहन एवं जब्त वाहनों के गायब होने की घटना की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।
संभावित बॉक्स आइटम :
बड़े सवाल
क्या पंचायत में वैधानिक प्रस्ताव पारित हुआ था?
तालाब गहरीकरण में 16 फीट तक खुदाई की अनुमति किस आधार पर दी गई?
18 हजार घनमीटर मुरूम उत्खनन का निर्धारण कैसे हुआ?
जब्त वाहन रातों-रात कैसे गायब हुए?
क्या प्रशासनिक कार्रवाई में बाधा पहुंचाई गई?
रॉयल्टी और परिवहन दस्तावेजों की वास्तविक स्थिति क्या है?









