पेट्रोल पंप में खून-खराबे वाली लूट की कोशिश, मालिक के पेट में घोंपा चाकू… दो साल बाद आया बड़ा फैसला…
रायगढ़। रात का सन्नाटा था। पेट्रोल पंप के कर्मचारी नींद में थे और संचालक रोज़मर्रा का हिसाब-किताब निपटा रहे थे। तभी एक युवक दबे पांव कार्यालय में घुसा और नकदी से भरा बैग उठाकर निकलने लगा। लेकिन अगले कुछ सेकंड में जो हुआ, उसने पूरे इलाके को दहला दिया।
जैसे ही पेट्रोल पंप संचालक खीरू राय की नजर संदिग्ध युवक पर पड़ी, उन्होंने उसे रोकने की कोशिश की। बैग छुड़ाने के दौरान आरोपी ने अचानक चाकू निकाल लिया और खीरू राय के पेट पर लगातार दो वार कर दिए। खून से लथपथ संचालक वहीं गिर पड़े, जबकि आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया।
यह सनसनीखेज घटना 28 अप्रैल 2024 की रात घरघोड़ा क्षेत्र के कसैया स्थित गोमती फ्यूल्स पेट्रोल पंप में हुई थी। घायल संचालक को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रायगढ़ रेफर किया गया था।
पुलिस जांच में खुली वारदात की परतें
घटना की सूचना मिलते ही घरघोड़ा पुलिस सक्रिय हुई। तत्कालीन उप निरीक्षक करमू साय पैंकरा के नेतृत्व में शुरू हुई जांच में पुलिस ने तकनीकी और प्रत्यक्ष साक्ष्य जुटाए। पूछताछ के दौरान आरोपी अस्मित नाग पुलिस के सामने ज्यादा देर तक टिक नहीं सका और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य जुटाकर न्यायालय में चालान पेश किया, जिसके बाद मामला अदालत में विचाराधीन रहा।
अदालत ने सुनाया सख्त फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने गवाहों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, दस्तावेजी साक्ष्य और दोनों पक्षों की दलीलों का गहन परीक्षण किया। सभी तथ्यों को परखने के बाद अपर सत्र न्यायालय घरघोड़ा के न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने आरोपी को दोषी करार दिया।
न्यायालय ने आरोपी अस्मित नाग को भारतीय दंड संहिता की धारा 458, 394 और 307 के तहत 7-7 वर्ष के सश्रम कारावास तथा प्रत्येक धारा में 1,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
प्रभावी पैरवी बनी सजा की वजह
मामले में राज्य शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों ने अदालत को यह विश्वास दिलाया कि आरोपी ने लूट की नीयत से घुसकर जानलेवा हमला किया था।
बड़ी बात
यह फैसला उन लोगों के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है जो लूट और हिंसा जैसी वारदातों को अंजाम देकर कानून से बच निकलने की उम्मीद रखते हैं। अदालत के इस निर्णय ने स्पष्ट कर दिया है कि गंभीर अपराधों में दोषियों को देर-सबेर कानून के शिकंजे में आना ही पड़ता है।









