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29/03/2026

कागजों में मजबूत, जमीन पर पूरी तरह फेल निकला “सुरक्षा” का मॉडल…

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एक झोंके में खुल गई सच्चाई, पिंक बूथ निर्माण पर उठे गंभीर सवाल

    सत्यम गौड़। फरीदपुर

    फतेहगंज पूर्वी के मुख्य चौराहे पर महिला महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों के बीच बनाया गया पिंक बूथ उद्घाटन से पहले ही सवालों के घेरे में आ गया है। शुक्रवार को चली तेज हवा में बूथ की टीन शेड अचानक टूटकर जमीन पर गिर गई। यह वही बूथ है जिसे महिलाओं की सुरक्षा के लिए अहम कदम बताया जा रहा था, लेकिन पहली ही परीक्षा में यह पूरी तरह फेल नजर आया।

    पहली ही आंधी में फेल हुआ “सुरक्षा ढांचा”

    स्थानीय लोगों के मुताबिक हवा बहुत तेज भी नहीं थी, इसके बावजूद टीन शेड का इस तरह गिरना निर्माण की गुणवत्ता पर सीधे सवाल खड़े करता है। लोगों का कहना है कि अगर मामूली तेज हवा में यह हाल है, तो तेज बारिश या आंधी में पूरा ढांचा गिर सकता है, जिससे बड़ा हादसा भी हो सकता है।

    सोशल मीडिया पर वायरल, उठे तीखे सवाल

    घटना का वीडियो X पर वायरल होते ही लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। यूजर्स ने इसे “दिखावटी काम” बताते हुए सवाल उठाया कि जब पुलिस का खुद का बूथ सुरक्षित नहीं है, तो आम महिलाओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी। कई लोगों ने यह भी लिखा कि निर्माण में जल्दबाजी और लापरवाही साफ नजर आ रही है।

    घटिया निर्माण का आरोप, लोकेशन पर भी विवाद

    स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि लोहे के एक साधारण ढांचे को बिना मजबूत आधार के खड़ा कर दिया गया। न गुणवत्ता का ध्यान रखा गया और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया गया। इतना ही नहीं, बूथ की लोकेशन को लेकर भी सवाल उठे हैं—लोगों का कहना है कि इसे जरूरत वाली जगह से हटाकर गलत स्थान पर लगाया गया है।

    पुलिस की सफाई

    थाना प्रभारी संतोष कुमार ने बताया कि पिंक बूथ अभी निर्माणाधीन है और इसे पूरी तरह तैयार नहीं माना जा सकता। उन्होंने कहा कि टीन शेड गिरने की सूचना के बाद संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली जा रही है। उनके अनुसार, यदि जांच में निर्माण में किसी प्रकार की कमी या लापरवाही पाई जाती है, तो ठेकेदार को इसे तुरंत ठीक करने के निर्देश दिए जाएंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण पूरा होने से पहले गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    बड़ा सवाल

    क्या ऐसे कमजोर निर्माण के साथ महिला सुरक्षा के दावे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं? या फिर जिम्मेदारों पर कार्रवाई कर इस व्यवस्था को वास्तव में मजबूत बनाया जाएगा?


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