सारंगढ़ में कलेक्टर परिवर्तन: ‘विकास पुरुष’ डॉ. संजय कन्नौजे की विदाई के बाद पद्मिनी साहू पर टिकी नई उम्मीदें, आखिर क्यों बार-बार बदल रहा जिले का प्रशासनिक चेह…
सारंगढ़। नवगठित जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ एक बार फिर बड़े प्रशासनिक बदलाव को लेकर चर्चा के केंद्र में है। जिले की कमान अब 2016 बैच की आईएएस अधिकारी पद्मिनी साहू को सौंपी गई है। उनके आगमन के साथ ही जिले को उसकी पांचवीं कलेक्टर मिल गई है। लगातार हो रहे कलेक्टर बदलावों ने आम जनता, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिला गठन के बाद से अब तक प्रशासनिक नेतृत्व में बार-बार परिवर्तन ने विकास की स्थिरता पर असर डालने की चिंता बढ़ा दी है। हर नए कलेक्टर के साथ प्राथमिकताएं बदलती हैं, योजनाओं की गति प्रभावित होती है और जनता को फिर से नए प्रशासनिक ढांचे के अनुरूप उम्मीदें बांधनी पड़ती हैं।
डॉ. संजय कन्नौजे को जिले में विकास कार्यों को गति देने वाले अधिकारी के रूप में देखा जाता रहा। उनके कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण योजनाओं को जमीन पर उतारने की कोशिश हुई, जिससे वे आम लोगों के बीच “विकास पुरुष” की छवि बनाने में सफल रहे। ऐसे समय में उनका स्थानांतरण कई लोगों के लिए अप्रत्याशित माना जा रहा है।
अब जिले की नई कलेक्टर पद्मिनी साहू से जनता को प्रशासनिक स्थिरता, तेज निर्णय क्षमता और विकास कार्यों में निरंतरता की उम्मीद है। उनकी कार्यशैली को लेकर प्रशासनिक हलकों में सकारात्मक चर्चा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वे जिले को लंबे समय तक स्थिर नेतृत्व दे पाएंगी?
लगातार तबादलों ने राजनीतिक हस्तक्षेप की चर्चाओं को भी हवा दी है। कई लोग इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे जिले की अंदरूनी राजनीतिक परिस्थितियों और बढ़ते दबाव का परिणाम बता रहे हैं।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जैसे नवोदित जिले के लिए मजबूत और स्थिर प्रशासनिक नेतृत्व बेहद जरूरी माना जा रहा है, ताकि विकास योजनाएं बिना रुकावट आगे बढ़ सकें और जनता को शासन की योजनाओं का सीधा लाभ मिल सके।
अब देखना होगा कि पद्मिनी साहू जिले में प्रशासनिक संतुलन, विकास की रफ्तार और जनता के विश्वास को किस तरह मजबूत करती हैं। फिलहाल सारंगढ़ की जनता की नजरें नए नेतृत्व पर टिकी हैं, जहां उम्मीदें भी हैं और कई अनसुलझे सवाल भी।









