7 दिन वेंटिलेटर पर जंग के बाद मासूम की मौत: पिता ने सारी कमाई इलाज में लगा दी, फिर भी नहीं बची बेटे की जान…
सत्यम गौड़। फरीदपुर
बरेली के भुता थाना क्षेत्र के भगवानपुर गांव में मातम पसरा हुआ है। संतोष कुमार का 7 साल का बेटा लाव्यांश अब इस दुनिया में नहीं रहा। 7 फरवरी को हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। एक सप्ताह तक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद शनिवार सुबह मासूम ने दम तोड़ दिया। जैसे ही लाव्यांश का शव गांव पहुंचा, परिजनों की चीखों से पूरा इलाका दहल उठा।
नशे में धुत दिनेश ने घर के बाहर खेल रहे बच्चे को कुचला, तड़पता छोड़ भागा
परिजनों ने बताया कि 7 फरवरी को लाव्यांश अपने घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान गांव का ही रहने वाला दिनेश कुमार अपनी स्कूटी लेकर आया। आरोप है कि दिनेश शराब के नशे में पूरी तरह धुत था और बेहद तेज रफ्तार में स्कूटी चला रहा था। उसने सीधे लाव्यांश को टक्कर मार दी, जिससे बच्चे के सिर में गंभीर चोट आई और पैर टूट गया। संवेदनहीनता की हद तो तब हो गई जब आरोपी लहूलुहान बच्चे की मदद करने के बजाय उसे वहीं तड़पता छोड़कर मौके से फरार हो गया।
मजदूर पिता ने इलाज में लगा दी पूरी जमा-पूंजी, वेंटिलेटर पर भी नहीं लौटी सांसें
संतोष कुमार मजदूर हैं। बेटे की जान बचाने के लिए उन्होंने अपनी जिंदगी भर की पाई-पाई दवाइयों में लगा दी। लाव्यांश को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वह 7 दिनों तक वेंटिलेटर पर रहा। पिता को उम्मीद थी कि उनका बेटा लौट आएगा, लेकिन शनिवार की सुबह काल बनकर आई। लाव्यांश की मौत के बाद अब परिवार में प्रियांशी (18), मानवी (14), सोनम (12), पलक (10) और ललित (11) ही बचे हैं।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल: पीड़ित का आरोप- ‘दरोगा बोले 20 हजार लेकर चुप हो जाओ’
दुख की इस घड़ी में पुलिस की संवेदनहीनता भी सामने आई है। परिजनों का गंभीर आरोप है कि जब वे इंसाफ की गुहार लेकर थाने पहुंचे, तो वहां मौजूद दरोगा ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय समझौता करने का दबाव बनाया। परिजनों का दावा है कि दरोगा ने उनसे कहा, “10-20 हजार रुपये ले लो और समझौता कर लो।” पुलिस के इस रवैये से पीड़ित परिवार में भारी आक्रोश है। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।




