कान्हा उपवन में ताला, बाहर गोरक्षक: अंदर क्या छिपा है? मीडिया पर रोक से उठा बड़ा सवाल…
बरेली से खास रिपोर्ट | सत्यम गौड़
बरेली के सीबीगंज क्षेत्र स्थित नदोसी कान्हा गौशाला शनिवार को उस वक्त सुर्खियों में आ गई, जब गौशाला के मुख्य द्वार पर गोरक्षक धरने पर बैठ गए और प्रशासन व व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। दिनभर चले इस घटनाक्रम ने न सिर्फ माहौल को तनावपूर्ण बनाया, बल्कि प्रशासन की कार्यशैली पर भी उंगलियां उठा दीं।
गेट पर रोके गए गोरक्षक, भड़का आक्रोश
अखिल भारतीय गौ रक्षा परिषद से जुड़े कार्यकर्ता गौशाला की स्थिति का निरीक्षण करने पहुंचे थे, लेकिन कर्मचारियों ने उन्हें गेट से आगे बढ़ने नहीं दिया। इसी बात से नाराज होकर गोरक्षकों ने मुख्य प्रवेश द्वार पर ही धरना शुरू कर दिया। देखते ही देखते आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए, जिससे हालात और गरमा गए।
नगर आयुक्त पहुंचे, पर मीडिया को रखा बाहर
हंगामा बढ़ता देख देर शाम नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे प्रतिनिधियों से बातचीत की। चुनिंदा सेवादारों को साथ लेकर वे अंदर गए, लेकिन इस दौरान मीडिया को गौशाला परिसर में प्रवेश नहीं दिया गया। गेट पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने पत्रकारों को साफ शब्दों में रोक दिया, जिससे यह सवाल और गहरा गया कि आखिर ऐसा क्या है, जिसे कैमरों से दूर रखा जा रहा है?
‘पहले सूचना दी, फिर भी किया अपमानित’
परिषद के अध्यक्ष हेमंत गंगवार ने आरोप लगाया कि गौशाला भ्रमण की सूचना पहले ही जिलाधिकारी को दी जा चुकी थी, इसके बावजूद कार्यकर्ताओं को अपमानजनक तरीके से रोका गया। उनका कहना है कि यह न सिर्फ गोरक्षकों का, बल्कि जनभावनाओं का भी अपमान है।
धरने के साथ रखी गईं कड़ी शर्तें
गोरक्षकों ने प्रशासन के सामने स्पष्ट शब्दों में मांगें रखीं—
▪️सुपरवाइजर विजय पाल समेत पूरे स्टाफ को तत्काल हटाकर कार्रवाई की जाए
▪️गौशाला का संचालन किसी समर्पित हिंदू संगठन को सौंपा जाए
▪️परिसर में चल रहे मछली पालन व डॉग पालन को तुरंत बंद किया जाए
▪️पुराने केयरटेकरों को बहाल कर लंबित मजदूरी का भुगतान हो
▪️भविष्य में मीडिया व गौ रक्षकों को बिना रोक-टोक प्रवेश दिया जाए
पुलिस छावनी में बदला इलाका
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर सीओ सेकेंड, सीबीगंज थाना प्रभारी प्रदीप कुमार चतुर्वेदी और फतेहगंज पश्चिमी थाना प्रभारी समेत भारी पुलिस बल तैनात किया गया। अधिकारियों ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन देर रात तक कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी।
‘मांगे पूरी होंगी तभी हटेंगे’
गोरक्षक संगठनों ने दो टूक कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
कान्हा उपवन के गेट पर लगा ताला अब सिर्फ लोहे का नहीं, बल्कि प्रशासन की पारदर्शिता पर लगा सवाल बन चुका है।




