कानून के रक्षक ही बने भक्षक! फरीदपुर थाने पर महिला उत्पीड़न के संगीन आरोप”…
▪️ “पुलिस की वर्दी में दबंगई? आईजी तक पहुँचा फरीदपुर उत्पीड़न मामला”
सत्यम गौड़। फरीदपुर
कानून की रखवाली करने वाली पुलिस ही जब कानून तोड़ने लगे तो आम नागरिक जाए तो जाए कहाँ?
फरीदपुर थाना क्षेत्र से सामने आए एक सनसनीखेज मामले में महिला ने सिपाही पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़िता ईश्वरवती का आरोप है कि द्वेषभावना और बिरादरीवाद के चलते थाना पुलिस द्वारा देर रात बार-बार उसके घर पुलिस भेजी जाती है। बिना किसी लिखित कारण और बिना महिला पुलिस के पुरुष पुलिसकर्मी घर में घुसकर तलाशी लेते हैं, जबकि पीड़िता अकेली अपनी मां के साथ रहती है। यह सीधे-सीधे महिला सम्मान और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है।
प्रार्थना-पत्र में बताया गया है कि गांव के पास चौड़ेरा के किसी से चल रहे विवाद में सिपाही द्वारा समझौते का दबाव बनाया जा रहा है। इनकार करने पर रोज-रोज पुलिस भेजकर मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है। पीड़िता का कहना है कि जब वह थाने से फोन पर जवाब मांगती है तो फोन काट दिया जाता है, जिससे साफ होता है कि पुलिस जवाबदेही से बच रही है।
इतना ही नहीं, पीड़िता ने आरोप लगाया कि जब वह थाने में लिखित शिकायत देती है तो उसे दबा दिया जाता है, और यदि कोई व्यक्ति उसके साथ न्याय की मांग करने जाता है तो उस पर झूठे मुकदमे लिखने की धमकी दी जाती है। यह मामला पुलिसिया आतंक और कानून के दुरुपयोग का गंभीर उदाहरण बनता जा रहा है।
मानसिक उत्पीड़न से टूट चुकी पीड़िता ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वह आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो सकती है। पीड़िता ने आईजी बरेली से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अब सवाल यह है कि क्या उच्च अधिकारी इस पुलिसिया दबंगई पर कार्रवाई करेंगे या फिर यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?




