अलीपुर गांव में राशन वितरण में अनियमितता का आरोप: ग्रामीणों ने की शिकायत, पूर्ति निरीक्षक ने जांच शुरू की…
सत्यम गौड़। बरेली
भुता ब्लॉक के गांव हरेली अलीपुर में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान पर राशन वितरण में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि कोटेदार द्वारा शासन के निर्देशों की अनदेखी करते हुए प्रति यूनिट आधा किलो राशन कम दिया जा रहा है। इसको लेकर गांव में रोष व्याप्त है।
गांव निवासी नितिन कुमार ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान से राशन लेने पहुंचे थे। दुकान का संचालन कोटेदार सरला देवी के नाम से है, जबकि वितरण का कार्य उनके पति रविंद्र गुप्ता द्वारा किया जा रहा था। आरोप है कि रविंद्र गुप्ता ने मशीन पर नितिन कुमार का अंगूठा लगवाकर प्रति यूनिट केवल 4.5 किलो राशन दिया, जबकि शासन के निर्देशानुसार 5 किलो राशन दिया जाना चाहिए।
नितिन कुमार का आरोप है कि जब उन्होंने नियमानुसार पूरा राशन देने की मांग की, तो उन्हें राशन मिलने की रसीद तो थमा दी गई, लेकिन राशन नहीं दिया गया। विरोध करने पर उन्हें दुकान से बाहर निकाल दिया गया। पीड़ित का कहना है कि इस दौरान कोटेदार पक्ष द्वारा अभद्रता भी की गई, जिससे उन्हें अपमानित महसूस हुआ।
ग्रामीण नितिन गंगवार ने भी कोटेदार पर प्रति यूनिट आधा किलो राशन कम देने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि गांव के कई अन्य लाभार्थियों के साथ भी इसी तरह की अनियमितता की जा रही है, लेकिन लोग डर या मजबूरी के चलते शिकायत नहीं कर पा रहे हैं।
घटना से नाराज ग्रामीणों ने एकत्र होकर प्रदर्शन किया और अपनी शिकायत सोशल मीडिया के माध्यम से भी दर्ज कराई। ग्रामीणों ने एक्स हैंडल पर जिलाधिकारी बरेली और मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को टैग करते हुए फरीदपुर पूर्ति निरीक्षक सुनील भटनागर से कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
इस संबंध में फरीदपुर पूर्ति निरीक्षक सुनील भटनागर ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक लाभार्थी को प्रति यूनिट 5 किलो राशन दिया जाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि मामले की शिकायत प्राप्त हुई है और इसकी जांच कराई जा रही है। यदि जांच में कोटेदार द्वारा राशन कम देने या किसी प्रकार की अनियमितता की पुष्टि होती है, तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल प्रशासनिक जांच शुरू कर दी गई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी और उन्हें उनका पूरा हक मिलेगा।




