Categories

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

06/02/2026

Naxal Surrender: महाराष्ट्र की महिला माओवादी कमांडर ने गरियाबंद में किया आत्मसमर्पण

Spread the love

गरियाबंद: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले की निवासी जानसी उर्फ वछेला मटामी ने माओवादी संगठन को अलविदा कहकर गरियाबंद पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. वे 8 लाख रूपए की ईनामी माओवादी थी. पुलिस के मुताबिक जानसी ने माओवादियों की खोखली विचारधारा, निर्दोष ग्रामीणों पर अत्याचार और संगठन के भीतर छोटे कैडरों के शोषण से तंग आकर यह कदम उठाया.

दुर्ग, बिलासपुर और रायपुर में साइबर ठगी का मामला, नकली ई-चालान लिंक से खाते खाली

पुलिस के मुताबिक जानसी का माओवादी संगठन से लंबा जुड़ाव रहा. 2005 में जनमिलिशिया सदस्य के रूप में शुरुआत करने वाली जानसी को 2006 में माओवादी कमांडर रनिता ने संगठन में भर्ती किया. इसके बाद उन्होंने विभिन्न भूमिकाओं में काम किया, जिसमें 2007 में गार्ड, 2008 से 2011 तक प्रेस संबंधी कार्य, और 2014 से 2022 तक नगरी एरिया कमेटी में कमांडर के पद शामिल हैं. 2022 से वह नगरी एरिया कमेटी की सचिव थीं.  लल्लूराम की खबर के मुताबिक जानसी ने बताया कि माओवादी संगठन अब निर्दोष ग्रामीणों की हत्या, विकास कार्यों में बाधा, ठेकेदारों से अवैध वसूली और युवाओं को जबरन भर्ती करने का अड्डा बन चुका है.

संगठन के बड़े कैडर छोटे कार्यकर्ताओं का शोषण करते हैं और स्थानीय लोगों को सरकार के खिलाफ भड़काते हैं. 2011 में डीव्हीसीएम सत्यम गावड़े से शादी करने वाली जानसी, उनके मुठभेड़ में मारे जाने के बाद मानसिक रूप से टूट गईं. जंगल की मुश्किल जिंदगी और आत्मसमर्पण करने वाले साथियों के बेहतर जीवन से प्रेरित होकर उन्होंने आत्मसमर्पण का फैसला किया.

स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल : एंबुलेंस न मिलने पर मरीज को 25 किमी तक टोकरी में ढोकर पहुंचाया अस्पताल

सरेंडर के बाद जानसी ने बताया कि समाचार पत्रों और गरियाबंद पुलिस के पोस्टर-पैंफलेट्स के जरिए उन्हें आत्मसमर्पण नीति की जानकारी मिली. कई अन्य माओवादी साथी जैसे आयतु, संजय, मल्लेश आदि भी इस नीति का लाभ उठा चुके हैं. सुकमा पुलिस की मदद से जानसी अब अपने परिवार के साथ नया और सम्मानजनक जीवन शुरू करना चाहती हैं.


Spread the love