ग्रीनफील्ड हाईवे पर किसानों का महाविरोध: डीपीआर छुपाने और 4 गुना मुआवजे की मांग पर रुकवाया करोड़ों का रोड प्रोजेक्ट…
kan / खाचरोद / कमलेश
उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना खाचरोद क्षेत्र में शुरू होते ही बड़े किसान आंदोलन की चपेट में आ गई। जैसे ही भाटखेड़ी गांव की सीमा में निर्माण कार्य के लिए मशीनें और संसाधन पहुंचे, किसानों ने मोर्चा संभाल लिया और काम तत्काल रुकवा दिया। किसानों का आरोप है कि बिना स्पष्ट डीपीआर, बिना पारदर्शिता और अधूरे मुआवजे के जबरन जमीन अधिग्रहण कर सड़क निर्माण शुरू किया जा रहा है।
भाटखेड़ी, उपलाई, रेवास, हुनखेड़ी और बंजारी सहित कई गांवों के सैकड़ों किसान मौके पर एकत्रित हो गए। किसानों का कहना है कि सरकार ने पहले वादा किया था कि सड़क सामान्य स्तर पर बनेगी और प्रभावित किसानों को चार गुना मुआवजा दिया जाएगा, लेकिन अब केवल दो गुना राशि देकर किसानों के साथ अन्याय किया जा रहा है। इससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
किसानों ने साफ कहा कि जब तक रोड की डीपीआर सार्वजनिक नहीं की जाती और 4 गुना मुआवजा सुनिश्चित नहीं होता, तब तक निर्माण कार्य किसी भी हालत में नहीं होने दिया जाएगा। उनका आरोप है कि प्रशासन और संबंधित विभाग जानबूझकर परियोजना की वास्तविक जानकारी छुपा रहे हैं, जिससे किसानों में आशंका है कि सड़क को ऊंचा बनाकर उनकी शेष भूमि और आजीविका पर भी गंभीर असर डाला जा सकता है।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कई किसानों ने दावा किया कि उनकी जमीन अधिग्रहित कर ली गई, लेकिन न तो उचित नोटिस मिला और न ही मुआवजा राशि पूरी तरह खातों में पहुंची। वहीं प्रशासनिक बयानों में भी विरोधाभास देखने को मिला, जिससे किसानों का अविश्वास और बढ़ गया।
एसडीएम नेहा साहू ने किसानों को डीपीआर दिखाने का आश्वासन दिया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जब तक कागजों में पूरी पारदर्शिता और न्याय नहीं मिलेगा, आंदोलन और तेज होगा।
अब यह मामला केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि किसान अधिकार, मुआवजा न्याय और प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी लड़ाई बन चुका है। खाचरोद में किसानों का यह उग्र विरोध साफ संकेत दे रहा है कि विकास परियोजनाओं के नाम पर यदि किसानों के हितों की अनदेखी हुई, तो जनआंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।









