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27/02/2026
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सारंगढ़-बिलाईगढ़।नवनिर्मित सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला में जल जीवन मिशन के तहत चल रहे निर्माण कार्यों पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कागज़ों में उपलब्धियों के दावे और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आ रहा है। खासतौर पर बरमकेला और बिलाईगढ़ ब्लॉक में घटिया निर्माण, अनियमितता और कथित भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। मामला अब विधानसभा में भी गूंजने की तैयारी में है।


विधायक ने उठाया सवाल
उत्तरी गनपत जांगड़े ने क्षेत्र से मिल रही शिकायतों के आधार पर विधानसभा में प्रश्न लगाया है। उनके अनुसार, कई गांवों में कार्य की गुणवत्ता बेहद खराब है और कार्य आवंटन की प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में है। सवाल यह है कि बड़े ठेकेदारों द्वारा पेटी कॉन्ट्रैक्टर्स को किस आधार पर दर्जनों गांवों का काम सौंपा गया?


किन कंपनियों पर उठे सवाल?
क्षेत्र में कार्य कर रहीं प्रमुख कंपनियों — आर्या कंस्ट्रक्शन कंपनी और सुनील कुमार अग्रवाल कंस्ट्रक्शन कंपनी — के नाम चर्चा में हैं। आरोप है कि इन कंपनियों के नाम पर पेटी ठेकेदारों ने बड़े पैमाने पर कार्य लिए और गुणवत्ता से समझौता किया।
हालांकि, आधिकारिक स्तर पर इन आरोपों की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।


शिकायतों में क्या-क्या सामने आया?
ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और श्रमिकों की शिकायतों में कई गंभीर बिंदु शामिल हैं:
एफएचटीसी चैंबर का आकार घटाया गया — निर्धारित 5×5 फीट के बजाय छोटे चैंबर बनाकर सीमेंट-रेती की बचत का आरोप।
मुख्य पाइपलाइन कम गहराई में डाली गई — मानक के अनुसार 1 मीटर नीचे डालना था, लेकिन कई जगह कम गहराई में डालने से भारी वाहनों के दबाव में पाइप फटने और लीकेज की समस्या।
पुराने व घटिया पीवीसी पाइप का उपयोग — जिससे भविष्य में बड़ी तकनीकी समस्या की आशंका।
कंपोजिट पाइपलाइन ठीक से दबाई नहीं गई — कई घरों में पाइप आधा फीट से भी कम गहराई में।
कम चैंबर, ज्यादा बिलिंग — बिना निर्माण के भुगतान निकालने का आरोप।
सीसी रोड रिपेयर में अनियमितता — जहां मरम्मत हुई, वहां भी एक माह में परत उखड़ने की शिकायत।
टंकी निर्माण में लापरवाही — बिना पर्याप्त इंजीनियर निगरानी के कार्य, कम सरिया-सीमेंट उपयोग और कई टंकियों में लीकेज।


प्रशासन हरकत में
19 फरवरी को कलेक्टर की समीक्षा बैठक में मामले का संज्ञान लिया गया। कुछ ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए और एक को ब्लैकलिस्ट भी किया गया है।
बताया जा रहा है कि कुछ ग्राम पंचायतों में अधूरा कार्य छोड़ने पर कार्रवाई हुई है। वहीं, कई गांवों में 90 प्रतिशत से अधिक भुगतान होने के बावजूद काम अधूरा होने की शिकायतों की जांच की मांग तेज हो गई है।


पीएचई विभाग पर भी सवाल
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप है कि दो ब्लॉकों की जिम्मेदारी एक ही जूनियर इंजीनियर पर होने से प्रभावी निगरानी नहीं हो पा रही। बिना पूर्ण जमीनी सत्यापन के बिलिंग होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि शिकायतों की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।


क्या विधानसभा में होगा बड़ा खुलासा?
विधानसभा में उठे सवाल के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। यदि जांच में अनियमितता सिद्ध होती है तो यह न केवल जिले बल्कि पूरे प्रदेश में जल जीवन मिशन की कार्यप्रणाली पर बड़ा

सवाल खड़ा कर सकता है।
अब नजरें जांच रिपोर्ट और विधानसभा की कार्यवाही पर टिकी हैं — क्या सच सामने आएगा या फाइलों में ही दब जाएगा?


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