SC समाज के लिए बजट में बड़ी सौगात, आस्था से शिक्षा तक करोड़ों के प्रावधान
हरिनाथ खूटे बोले – यह सम्मान, विकास और विश्वास का बजट
रायपुर। छत्तीसगढ़ के ताजा राज्य बजट में अनुसूचित जाति (SC) समाज के विकास को विशेष प्राथमिकता दी गई है। धार्मिक आस्था केंद्रों के उन्नयन, शिक्षा के विस्तार और बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण के लिए करोड़ों रुपये के प्रावधान किए गए हैं। भाजपा प्रदेश महामंत्री (अजा मोर्चा) हरिनाथ खुटे ने इन घोषणाओं का स्वागत करते हुए इसे समाज के सर्वांगीण उत्थान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
🛕 आस्था केंद्रों के विकास पर फोकस
सरकार ने गुरु घासीदास बाबा की तपोभूमि और समाज के प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास के लिए विशेष बजट आवंटित किया है।
भंडारपुरी में गुरुद्वारा (मोतीमहल) के लिए 17 करोड़ रुपये और डोम निर्माण हेतु 1 करोड़ रुपये का प्रावधान।
गिरौदपुरी मेला के लिए वार्षिक सहायता राशि 25 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये।
गिरौदपुरी और भंडारपुरी के समग्र उन्नयन हेतु 5 करोड़ 60 लाख रुपये स्वीकृत।
मड़वा में सतनाम धर्मशाला के लिए 50 लाख रुपये।
मुंगेली स्थित सतनाम भवन के पुनरुद्धार हेतु 25 लाख रुपये।
भिलाई सतनाम भवन में डोम निर्माण के लिए 50 लाख रुपये।
इन घोषणाओं को समाज की सांस्कृतिक पहचान और आस्था के संरक्षण की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
🎓 शिक्षा और युवाओं के भविष्य पर निवेश
सरकार ने अनुसूचित जाति वर्ग के छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया है।
4 प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास
1 क्रीड़ा परिसर
1 प्रयास विद्यालय भवन
➡️ इन सभी निर्माण कार्यों के लिए कुल 25 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित।
इसके अलावा राजधानी रायपुर में समाज के भव्य भवन निर्माण के लिए 1 करोड़ रुपये तथा ग्राम सेतगंगा में सामुदायिक भवन हेतु 50 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
🗣️ “अंत्योदय की भावना को साकार करता बजट” — हरिनाथ खुटे
भाजपा प्रदेश महामंत्री हरिनाथ खुटे ने कहा कि यह बजट समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाने के संकल्प को मजबूत करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि इन योजनाओं से न केवल बुनियादी ढांचा मजबूत होगा, बल्कि समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को भी नई पहचान मिलेगी।
📌 बड़ा संदेश
राज्य सरकार के इस बजट को अनुसूचित जाति वर्ग के सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि इन घोषणाओं का क्रियान्वयन कितनी तेजी और पारदर्शिता से होता है।







