जब टूटने की कगार पर थे रिश्ते, तब सहारा बनी काउंसलिंग
महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्र: जहाँ ढाई साल में 186 परिवारों को फिर से जोड़ा गया
आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी, बढ़ती अपेक्षाएँ और लगातार बढ़ता मानसिक दबाव पारिवारिक रिश्तों को भीतर से कमजोर कर रहा है। मोबाइल और इंटरनेट ने जहाँ दुनिया को नज़दीक लाया है, वहीं वैवाहिक जीवन में छोटी-छोटी गलतफहमियों को बड़े विवादों में बदलने का कारण भी बना है।
हालात यहाँ तक पहुँच जाते हैं कि पति-पत्नी के बीच का विवाद थाने और अदालत की दहलीज़ तक पहुँच जाता है। इसका असर सिर्फ दो लोगों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा परिवार मानसिक तनाव, डर और असुरक्षा से घिर जाता है। कई बार यह तनाव इतना गहरा होता है कि लोग जीवन से हार मान लेने जैसी स्थिति में पहुँच जाते हैं।
ऐसे नाज़ुक समय में सही मार्गदर्शन, संवेदनशील संवाद और समय पर की गई काउंसलिंग एक नई उम्मीद बनकर सामने आती है। यहीं से महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्र की भूमिका शुरू होती है—एक ऐसा मंच, जहाँ टूटते रिश्तों को थामने, संवाद को फिर से जीवित करने और परिवार को बिखरने से बचाने का ईमानदार प्रयास किया जाता है। यह केंद्र सिर्फ विवाद सुलझाने का स्थान नहीं, बल्कि भरोसे, समझ और पुनर्निर्माण की मिसाल है।
एन.ई.बी थाना परिसर का महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्र: उम्मीद की एक मजबूत कड़ी
अलवर के एन.ई.बी थाना परिसर में संचालित महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्र ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही समय पर सही हस्तक्षेप हो, तो रिश्तों को बचाया जा सकता है।
पिछले लगभग ढाई वर्षों में केंद्र के पास 188 पारिवारिक मामले आए, जिनमें से 186 मामलों में आपसी समझौते के माध्यम से परिवारों को टूटने से बचाया गया। यह आँकड़ा नहीं, बल्कि 186 परिवारों की मुस्कान, बच्चों का सुरक्षित भविष्य और रिश्तों की नई शुरुआत है।
सितंबर 2023 से दिसंबर 2025 के बीच केंद्र में आए मामलों में गहराई से काउंसलिंग कर पति-पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों के बीच संवाद को दोबारा स्थापित किया गया। झगड़े और आरोपों के बीच फंसे रिश्तों को समझ, धैर्य और संवेदनशीलता के साथ फिर से जोड़ने का प्रयास किया गया।


वर्षवार स्थिति: आँकड़ों में दिखती सफलता
सितंबर 2023 से 31 दिसंबर 2023 तक
कुल 16 पारिवारिक मामले सामने आए।
इनमें से 14 मामलों में आपसी समझौता कराया गया, जबकि 2 मामलों में पुलिस कार्रवाई आवश्यक हुई। काउंसलिंग के बाद 14 परिवारों ने किसी भी प्रकार की कानूनी कार्यवाही नहीं चाही।
वर्ष 2024 (1 जनवरी से 31 दिसंबर)
कुल 93 पारिवारिक मामले केंद्र पर पहुँचे।
सभी 93 मामलों में सफलतापूर्वक समझौता कराकर परिवारों को साथ रखा गया।
वर्ष 2025 (1 जनवरी से 31 दिसंबर)
कुल 79 मामले आए, जिन पर गंभीरता से काउंसलिंग की गई और समाधान की दिशा में ठोस प्रयास किए गए।
क्यों बढ़ रहे हैं पारिवारिक विवाद?
केंद्र के अधिकारियों के अनुसार एन.ई.बी अलवर क्षेत्र में अधिकांश पारिवारिक विवादों की शुरुआत महिला अत्याचार, मारपीट, दहेज उत्पीड़न और पति द्वारा शराब सेवन जैसी समस्याओं से होती है।
जब दोनों पक्षों की बात ध्यान से सुनी जाती है, तो यह सामने आता है कि करीब 70 प्रतिशत मामलों में पति या पत्नी का किसी अन्य व्यक्ति से संबंध पारिवारिक कलह की बड़ी वजह बनता है।
इसके अलावा घरेलू हिंसा, शराब के नशे में मारपीट, दहेज की मांग, परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा प्रताड़ना और महिलाओं से छेड़छाड़ जैसे गंभीर मामले भी सामने आते हैं। ऐसे हर मामले में केंद्र पर दोनों पक्षों की बात को बिना पक्षपात सुना जाता है और स्थिति की गंभीरता को समझते हुए काउंसलिंग के ज़रिए समाधान खोजने का प्रयास किया जाता है।
संचालन और समर्पित टीम
महिला अधिकारिता विभाग द्वारा अनुदानित इस महिला सुरक्षा एवं सलाह केंद्र का संचालन स्पेक्ट्रा संस्था द्वारा एन.ई.बी थाना अलवर में किया जा रहा है।
केंद्र में कानूनी सलाहकार साक्षी बावलिया और सामाजिक सलाहकार रजनी वर्मा अपने अनुभव, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ परिवारों को टूटने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

जागरूकता: समस्या से पहले समाधान की पहल
केंद्र केवल विवाद सुलझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने का भी महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। आसपास की आवासीय बस्तियों, स्कूलों और महिला कार्यस्थलों पर समय-समय पर जागरूकता शिविर आयोजित किए जाते हैं।
इन शिविरों में महिला एवं बाल हिंसा, यौन उत्पीड़न और शोषण जैसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा की जाती है, सुरक्षा के उपाय बताए जाते हैं और यह जानकारी दी जाती है कि आवश्यकता पड़ने पर किस तरह कानूनी सहायता प्राप्त की जा सकती है।




