कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू को भेंट की अपनी पुस्तक ‘हनुमान चालीसा का रहस्यमयी विज्ञान’।

हनुमान चालीसा की 40 चौपाइयों का आधुनिक विज्ञान के नजरिए से विश्लेषण, ऊर्जा, चेतना और ब्रह्मांडीय सिद्धांतों को बनाया विषय
सारंगढ़-बिलाईगढ़, 30 अक्टूबर 2026। भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के बीच संबंधों को समझने की दिशा में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम छिंद निवासी युवा लेखक एवं शोधकर्ता कमल दास महंत ने एक अनूठी पहल की है। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘हनुमान चालीसा का रहस्यमयी विज्ञान’ कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू को भेंट की। इस दौरान उन्होंने पुस्तक की विषयवस्तु और अपने अध्ययन एवं शोध कार्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
कलेक्ट्रेट कार्यालय में हुई इस सौजन्य मुलाकात के दौरान लेखक कमल दास महंत ने बताया कि उनकी पुस्तक में हनुमान चालीसा की सभी 40 चौपाइयों का आधुनिक भौतिकी, चेतना विज्ञान और ब्रह्मांडीय सिद्धांतों के संदर्भ में विश्लेषण करने का प्रयास किया गया है। पुस्तक का उपशीर्षक ‘ऊर्जा, चेतना, ब्रह्मांड’ रखा गया है। इसके माध्यम से भक्ति और विज्ञान के बीच संभावित संबंधों को एक नए दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है।
भक्ति और विज्ञान के संबंधों को समझने का प्रयास
लेखक कमल दास महंत के अनुसार, भारतीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक साहित्य में निहित विचारों को आधुनिक वैज्ञानिक अवधारणाओं के संदर्भ में समझना उनकी रुचि का प्रमुख विषय है। इसी उद्देश्य से उन्होंने हनुमान चालीसा की चौपाइयों का अध्ययन और विश्लेषण कर पुस्तक तैयार की है।
आधुनिक विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा पर कर रहे अध्ययन
कमल दास महंत लेखक, शोधकर्ता, सॉफ्टवेयर इंजीनियर और डिजिटल उद्यमी के रूप में विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं। आधुनिक विज्ञान, भौतिकी, ब्रह्मांड, तकनीक, भारतीय दर्शन, वेद, उपनिषद, पुराण और सनातन ज्ञान परंपरा उनके अध्ययन के प्रमुख विषय हैं।
वे इन विषयों को तर्क, अध्ययन और विश्लेषण के माध्यम से सरल भाषा में आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
पहली पुस्तक भी वैज्ञानिक विषयों पर आधारित
कमल दास महंत की पहली पुस्तक ‘E=MC² Modified: The Kamal Einstein Unified Field Theory’ ऊर्जा, द्रव्यमान, गुरुत्वाकर्षण और एकीकृत क्षेत्र सिद्धांत जैसे विषयों पर आधारित है। पुस्तक परिचय के अनुसार, उनके शोध-पत्र भी भौतिकी, ऊर्जा विज्ञान, चेतना अध्ययन, ब्रह्मांड विज्ञान और भारतीय ज्ञान परंपरा से संबंधित विषयों पर प्रकाशित हुए हैं।
युवा लेखक की इस पहल से जिले में साहित्य, शोध और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े अध्ययन को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
















