जिले में आखिर कब लगेगा गौ तस्करी पर प्रभावी अंकुश? बार-बार कार्रवाई के बावजूद नहीं थम रही शिकायतें, विशेष अभियान चलाने की उठी मांग

सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले में गौ तस्करी को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। समय-समय पर गौवंश से भरे वाहनों के पकड़े जाने और पुलिस कार्रवाई की खबरें सामने आती रही हैं, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा बनी हुई है कि आखिर इस कथित अवैध कारोबार पर स्थायी रूप से अंकुश कब लगेगा।
सारंगढ़, कोसीर, सरसींवा, भटगांव और बिलाईगढ़ सहित जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से समय-समय पर गौवंश की संदिग्ध आवाजाही और तस्करी की शिकायतें सामने आने की बात कही जाती रही है। स्थानीय गौसेवकों का दावा है कि सीमित संसाधनों के बावजूद वे लगातार सक्रिय रहते हैं और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस एवं प्रशासन को देते हैं। कई मामलों में इन सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई भी हुई है।
जोगीडीपा गौठान को लेकर भी उठे सवाल
हाल के दिनों में सरसींवा क्षेत्र के ग्राम जोगीडीपा स्थित गौठान में बड़ी संख्या में गौवंश रखे जाने को लेकर भी चर्चाएं सामने आई हैं। हालांकि इस संबंध में वास्तविक स्थिति क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
ऐसे में स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराए। यदि किसी प्रकार का नियम उल्लंघन या अवैध गतिविधि सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। वहीं यदि शिकायतें तथ्यहीन पाई जाती हैं तो प्रशासन को भी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि अफवाहों पर विराम लग सके।
गौ संरक्षण सिर्फ राजनीतिक मुद्दा न बने
गौ संरक्षण को लेकर आमजन के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर इस संवेदनशील विषय पर ठोस और स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं बन पा रही है। लोगों का कहना है कि सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, गौ संरक्षण केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि धरातल पर प्रभावी व्यवस्था दिखाई देनी चाहिए।
पूर्व की घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
जिले में पूर्व में गौमांस बरामद होने जैसी घटनाओं की खबरें भी सामने आ चुकी हैं। ऐसी घटनाओं को लेकर लोगों में चिंता है। यदि किसी क्षेत्र में संगठित तरीके से अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं तो उनकी पहचान कर निष्पक्ष जांच और कानून के मुताबिक कार्रवाई किए जाने की जरूरत है।
गौशालाओं और गौठानों की व्यवस्था भी बने निगरानी का हिस्सा
गौ तस्करी के अलावा गौशालाओं और गौठानों की व्यवस्थाओं को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। बेसहारा गौवंश के लिए पर्याप्त आश्रय और चारे की व्यवस्था नहीं होने पर बड़ी संख्या में पशु सड़कों पर नजर आते हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है और किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचता है।
विशेष अभियान की जरूरत
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि जिले में पुलिस, प्रशासन, पशुपालन विभाग और स्थानीय निकायों के समन्वय से विशेष गौ संरक्षण एवं निगरानी अभियान चलाया जाए।
इस अभियान के तहत संवेदनशील और सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, संदिग्ध वाहनों की नियमानुसार जांच करने, गौठानों की व्यवस्थाओं की समीक्षा करने और किसी भी संगठित अवैध नेटवर्क की निष्पक्ष जांच जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
अब सवाल कार्रवाई से आगे व्यवस्था का है
बार-बार कार्रवाई के बावजूद यदि शिकायतें सामने आती रहती हैं तो केवल अलग-अलग मामलों में कार्रवाई करने के बजाय पूरे नेटवर्क और उसके संभावित रास्तों की पहचान करना जरूरी है।
जनता की मांग स्पष्ट है—गौ संरक्षण के नाम पर राजनीति नहीं, बल्कि पारदर्शी व्यवस्था, नियमित निगरानी और कानून के मुताबिक ठोस कार्रवाई हो। सामूहिक प्रयास से ही जिले में गौवंश की सुरक्षा और इस तरह की अवैध गतिविधियों पर प्रभावी रोक संभव है।
















