इंटरव्यू के दौरान दुर्गा साहू की मधुर, ओजपूर्ण और भावपूर्ण पंडवानी प्रस्तुति ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। उनकी आवाज़ में छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत की आत्मा स्पष्ट झलकती है। यही कारण रहा कि उन्होंने इस प्रतिभाशाली लोक कलाकार को आधुनिक तकनीकी संसाधनों से सहयोग देने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में लोक कलाकारों के लिए केवल मंच ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक भी उतनी ही आवश्यक है। यदि कलाकारों के पास बेहतर रिकॉर्डिंग और लाइव प्रसारण के संसाधन हों, तो वे अपनी कला को यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से देश-विदेश तक पहुँचा सकते हैं। दुर्गा साहू जैसी प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है, क्योंकि वे छत्तीसगढ़ की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत बनाए रखने का कार्य कर रही हैं।

लोक कलाकारों को दिया जा रहा मंच अत्यंत सराहनीय है। ऐसे प्रयासों से प्रदेश की प्रतिभाओं को नई पहचान मिल रही है और समाज भी उनकी कला से जुड़ रहा है। उन्होंने कहा कि दुर्गा साहू का इंटरव्यू देखने के बाद उन्हें लगा कि ऐसी प्रतिभा को आधुनिक संसाधनों से जोड़ना आवश्यक है, ताकि उनकी पंडवानी अधिक से अधिक लोगों तक पहुँच सके।

इस अवसर पर दुर्गा साहू ने समाजसेवी माधव यादव के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सहयोग उनके लिए केवल आधुनिक उपकरणों की सौगात नहीं, बल्कि उनकी कला, वर्षों की साधना और छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ट्राइपॉड, मोबाइल माइक्रोफोन और लाइव स्ट्रीमिंग किट की सहायता से अब वे अपनी पंडवानी प्रस्तुतियों को बेहतर गुणवत्ता के साथ रिकॉर्ड और लाइव प्रसारित कर सकेंगी, जिससे प्रदेश की समृद्ध लोककला देश-विदेश तक पहुँचेगी।

दुर्गा साहू ने विशेष धन्यवाद देते हुए कहा कि इसी मंच पर प्रसारित उनके इंटरव्यू के माध्यम से उनकी कला को व्यापक पहचान मिली और समाजसेवी माधव यादव जैसे संवेदनशील व्यक्तित्व का स्नेह एवं प्रोत्साहन प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें भविष्य में और अधिक समर्पण के साथ पंडवानी और छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की सेवा करने के लिए प्रेरित करेगा।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने कहा कि लोक कलाकारों को केवल सम्मानित करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें समय के अनुरूप तकनीकी संसाधनों से भी जोड़ना आवश्यक है। ऐसे प्रयास कलाकारों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

गौरतलब है कि दुर्गा साहू अपनी सशक्त वाणी, प्रभावशाली मंच संचालन शैली और भावपूर्ण पंडवानी गायन के लिए प्रदेशभर में विशेष पहचान रखती हैं। वे विभिन्न धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक आयोजनों में अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह रही हैं। उनकी पंडवानी केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकपरंपरा, संस्कृति और भारतीय महाकाव्य की जीवंत अभिव्यक्ति है।

समाजसेवी माधव यादव की यह पहल न केवल एक कलाकार का सम्मान है, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोककला, लोकसंस्कृति और पंडवानी जैसी अमूल्य परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में भी एक प्रेरणादायी कदम है। ऐसे प्रयास निश्चित रूप से प्रदेश के अन्य लोक कलाकारों के लिए भी प्रेरणा बनेंगे और उन्हें आधुनिक तकनीक के माध्यम से अपनी कला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने का अवसर प्रदान करेंगे।

लोक कलाकारों को मंच देने और उनकी प्रतिभा को जन-जन तक पहुँचाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि भविष्य में भी प्रदेश की कला, संस्कृति और लोक परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुँचाने के लिए ऐसे विशेष कार्यक्रम और प्रेरणादायी साक्षात्कार लगातार प्रस्तुत किए जाते रहेंगे।