12/10/2026

मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना से कुपोषण मुक्त जिला बनाने की मुहिम तेज, जून में 19 विशेष शिविर आयोजित…

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573 कुपोषित बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण, 422 को दवाइयां वितरित और 45 बच्चों को एनआरसी भेजा गया


सारंगढ़-बिलाईगढ़, 10 जुलाई 2026।

जिले को कुपोषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन लगातार प्रभावी पहल कर रहा है।

कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू के मार्गदर्शन एवं पहल पर जिले में “कुपोषण मुक्त सारंगढ़-बिलाईगढ़” अभियान चलाया जा रहा है।

इस अभियान के तहत मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना के माध्यम से कुपोषित बच्चों की पहचान कर उनका उपचार, पोषण प्रबंधन एवं नियमित निगरानी सुनिश्चित की जा रही है।


जिला प्रशासन द्वारा अधिकारियों को चिन्हित आंगनबाड़ी केंद्रों के कुपोषित बच्चों को गोद लेने की जिम्मेदारी दी गई है।

अधिकारी संबंधित केंद्रों में पहुंचकर बच्चों के वजन एवं लंबाई का सत्यापन कर रहे हैं तथा गोद लिए गए बच्चों के स्वास्थ्य की लगातार निगरानी और फॉलोअप भी किया जा रहा है।

साथ ही जिन पंचायतों में कुपोषण की दर अधिक है, वहां विशेष अभियान चलाकर भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) एवं रेडक्रॉस जैसी स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।


इसी क्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त समन्वय से जून माह के दौरान सारंगढ़, कोसीर, बरमकेला एवं लेन्धरा परियोजना के विभिन्न सेक्टरों में मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना के तहत कुल 19 विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए गए।

इन शिविरों में 573 कुपोषित बच्चों का चिकित्सकीय परीक्षण किया गया।

जांच के बाद 422 बच्चों को आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई गईं, जबकि गंभीर रूप से कुपोषित 45 बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) भेजा गया, जहां उनका विशेष उपचार एवं पोषण देखभाल की जा रही है।


मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना का मुख्य उद्देश्य कुपोषित एवं संकटग्रस्त बच्चों को कुपोषण के दुष्चक्र से बाहर निकालना, समय पर चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध कराना तथा उनकी पोषण स्थिति में सुधार लाना है।

इस योजना के तहत बच्चों का विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं बाल रोग विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण कर आवश्यक परामर्श और उपचार उपलब्ध कराया जाता है, ताकि वे स्वस्थ एवं सामान्य विकास की ओर अग्रसर हो सकें।


जिला प्रशासन ने बताया कि कुपोषण मुक्त सारंगढ़-बिलाईगढ़ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों तथा विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से अभियान निरंतर जारी रहेगा।

नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण परामर्श, दवा वितरण एवं आवश्यकतानुसार एनआरसी में भर्ती जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से जिले में कुपोषण की दर को लगातार कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।


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