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05/04/2026

करेंट से चालीस फीट नीचे गिरे मजदुर एक की मौत : स्वदेश मेटालिक की लापरवाही बेनकाब

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रिपोर्टर _ दिलीप वर्मा

औद्योगिक विकास के दावों के बीच एक बार फिर मजदूरों की जान सस्ती साबित होती दिख रही है। ग्राम केसदा सीमा में संचालित स्वदेश मेटालिक उद्योग की घोर लापरवाही ने एक युवक की जिंदगी निगल ली, जबकि दूसरा युवक जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहा है।
जानकारी के मुताबिक, ग्राम झिरिया निवासी दो मजदूर युवक बीते दिन लगभग 40 फीट ऊंचाई पर काम के दौरान करंट की चपेट में आ गए। बताया जा रहा है कि क्रेन में लगे लोहे के हिस्से में पहले से करंट प्रवाहित था, जिसकी चपेट में आते ही दोनों युवक नीचे आ गिरे। इस दर्दनाक हादसे में बीस वर्षीय वासुदेव ध्रुव जो घर का चिराग था  जिसकी एक बहन है वह चिराग बुझ गया   , जबकि दूसरा परमेश्वर ध्रुव गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस युवक की मौत हुई, उसे हाल ही में उसके मूल कार्य (फेब्रिकेशन) से हटाकर दूसरे काम में लगाया गया था, जहां न तो पर्याप्त प्रशिक्षण दिया गया और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। यह सीधे-सीधे प्रबंधन की लापरवाही और मजदूरों की जान के साथ खिलवाड़ को दर्शाता है।
इधर, उद्योग प्रबंधन पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश में जुट गया है। सूत्रों के अनुसार, मृतक के परिजनों को महज 20 लाख रुपये मुआवजा देने का आश्वासन देकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। सवाल यह उठता है कि क्या एक जवान जिंदगी की कीमत सिर्फ 20 लाख तय कर दी गई है?
औद्योगिक सुरक्षा मानकों और श्रम कानूनों की खुली अनदेखी के बावजूद जिम्मेदार विभाग अब तक खामोश नजर आ रहे हैं। क्या यह खामोशी किसी बड़े दबाव का परिणाम है या फिर हर बार की तरह यह मामला भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा?
यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का जीता-जागता उदाहरण है। मजदूरों की सुरक्षा को ताक पर रखकर मुनाफा कमाने वाले उद्योगों पर यदि अब भी सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं।
अब निगाहें प्रशासन और संबंधित विभाग पर टिकी हैं—क्या दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी या फिर एक और मामला समझौते की भेंट चढ़ जाएगा?


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