जिला अस्पताल में भाजपा का प्रचार? सरकारी परिसर में कमल वाले होर्डिंग से मचा बवाल…
सत्यम गौड़। बरेली
जिला अस्पताल परिसर में भारतीय जनता पार्टी के चुनाव चिन्ह कमल के साथ लगे होर्डिंग को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सरकारी अस्पताल जैसे संवेदनशील और सार्वजनिक स्थल पर राजनीतिक प्रचार सामग्री लगाए जाने से प्रशासन की निष्पक्षता और सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग पर सवाल उठने लगे हैं।
बताया जा रहा है कि होर्डिंग पर होली की शुभकामनाओं के नाम पर भाजपा नेताओं की तस्वीरें और पार्टी का चुनाव चिन्ह प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। विपक्ष और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह शुभकामना के बहाने राजनीतिक संदेश देने का प्रयास है।
सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का आरोप
मामले में राज्य सलाहकार बोर्ड के एक सदस्य पर सरकारी परिसर का राजनीतिक उपयोग कराने का आरोप लगाया गया है। जिला अस्पताल परिसर सार्वजनिक संपत्ति की श्रेणी में आता है, जहां किसी भी प्रकार का राजनीतिक प्रचार नियमों के खिलाफ माना जाता है।
आदर्श आचार संहिता पर सवाल
भारत निर्वाचन आयोग की आदर्श आचार संहिता (MCC) के अनुसार चुनाव अवधि में सरकारी भवनों, अस्पतालों और सार्वजनिक संस्थानों में किसी भी राजनीतिक दल के पोस्टर, बैनर या होर्डिंग नहीं लगाए जा सकते। भले ही वर्तमान में चुनाव अवधि लागू हो या न हो, अस्पताल जैसे स्थानों की राजनीतिक निरपेक्षता बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
संवेदनशील स्थान पर राजनीति अनुचित
विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र होता है, न कि राजनीतिक प्रचार का माध्यम। ऐसे स्थानों पर राजनीतिक प्रतीकों का उपयोग न केवल नैतिक रूप से अनुचित है, बल्कि इससे सार्वजनिक संस्थानों की निष्पक्ष छवि भी प्रभावित होती है।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल
जिला अस्पताल के अधीक्षक और जिला प्रशासन की ओर से अब तक इस मामले में कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। यह सवाल उठ रहा है कि अस्पताल परिसर में इस तरह के होर्डिंग लगाने की अनुमति किसके आदेश से दी गई।
सपा नेता ने जताई आपत्ति
समाजवादी पार्टी के नेता मयंक शुक्ला ने इस मामले पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि जिला अस्पताल परिसर में भाजपा का बैनर लगना बेहद गंभीर मामला है। यदि सरकारी कर्मचारियों या अधिकारियों की मिलीभगत से यह किया गया है तो यह न केवल प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल है, बल्कि भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है।
उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि सरकारी संस्थानों का राजनीतिक दुरुपयोग रोका जा सके।
जनता में नाराजगी
इस घटना के बाद आम जनता और मरीजों के बीच भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि अस्पताल इलाज के लिए होता है, न कि राजनीतिक प्रचार के लिए।




