Categories

Social menu is not set. You need to create menu and assign it to Social Menu on Menu Settings.

14/02/2026

विकास के दावों पर सवाल: भाजपा शासन में बरेली से हटाई गई बड़ी स्वास्थ्य योजना…

Spread the love

सत्यम गौड़। बरेली

    प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत बरेली में प्रस्तावित क्रिटिकल केयर ब्लॉक और एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला को अब बरेली की बजाय लखनऊ में स्थापित किए जाने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले से बरेली समेत पूरे तराई क्षेत्र को बड़ा झटका लगा है और सरकार के विकास दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

     बताया जा रहा है कि गंभीर मरीजों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बरेली में यह महत्वपूर्ण स्वास्थ्य परियोजना प्रस्तावित थी, लेकिन अब इसे स्थानांतरित कर दिया गया है। इस संबंध में जानकारी लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में सामने आई है।

     स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 से 2026 के बीच बरेली जिले में उपयुक्त भूमि उपलब्ध न हो पाने के कारण इस परियोजना को लखनऊ शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया। जबकि स्थानीय स्तर पर लंबे समय से इस योजना की मांग की जा रही थी।

संक्रमण प्रभावित क्षेत्र को बड़ा झटका

बरेली और आसपास का तराई क्षेत्र मलेरिया, डेंगू, जापानी इंसेफेलाइटिस, एंटरोवायरस और स्क्रब टाइफस जैसी गंभीर बीमारियों से प्रभावित रहा है। ऐसे में क्रिटिकल केयर ब्लॉक और आधुनिक जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला का बरेली से हटाया जाना स्थानीय जनता के स्वास्थ्य हितों के खिलाफ माना जा रहा है।

डायलिसिस और कीमोथेरेपी पर भी निर्भरता

स्वास्थ्य मंत्री ने डायलिसिस और कीमोथेरेपी सेवाओं के विस्तार को लेकर कहा कि यह राज्यों की मांग और संसाधनों के आवंटन पर निर्भर करता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार अभी भी प्रशासनिक प्राथमिकताओं और संसाधन प्रबंधन तक सीमित है।

सांसद ने जताई नाराजगी

इस मुद्दे पर बरेली के सांसद नीरज मौर्य ने गहरी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि यदि स्वास्थ्य जैसी आवश्यक योजनाओं के लिए भी प्रशासन भूमि उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, तो यह स्थानीय स्तर पर गंभीर विफलता को दर्शाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि वे प्रदेश सरकार से मिलकर इस परियोजना को पुनः बरेली में स्थापित कराने का प्रयास करेंगे।

बजट और ज़मीनी हकीकत में अंतर

सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि बजट आवंटन और ज़मीनी क्रियान्वयन के बीच बड़ा अंतर है। आवश्यकता इस बात की है कि स्वीकृत स्वास्थ्य परियोजनाओं की समयबद्ध निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि योजनाएं केवल कागज़ों तक सीमित न रहकर आम जनता तक वास्तविक लाभ पहुँचा सकें।


Spread the love