फरीदपुर में ‘विकास’ बना संकट! ओवरब्रिज निर्माण से पूरा शहर ठप — स्कूली बच्चे रोज़ मौत के साये में गुजरने को मजबूर…
▪️संसद तक गूंजा मामला, सांसद नीरज मौर्य ने कहा — “किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार क्यों?”
सत्यम गौड़। फरीदपुर
नगर पालिका परिषद फरीदपुर में रेलवे लाइन क्रॉसिंग पर बन रहा ओवरब्रिज अब स्थानीय जनता के लिए राहत नहीं बल्कि बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। पुल निर्माण के चलते मुख्य मार्ग को पूरी तरह बंद कर दिया गया है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि प्रशासन ने अब तक कोई सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं कराया।
नतीजा — आम जनता, बुजुर्ग, मरीज और सबसे ज्यादा स्कूली बच्चे रोज़ जान जोखिम में डालकर निकलने को मजबूर हैं।
स्कूल जाते बच्चों के लिए खतरनाक सफर
सुबह और दोपहर के समय बच्चे रेलवे ट्रैक और संकरे अस्थायी रास्तों से गुजरते दिखते हैं। अभिभावकों में भारी डर और नाराज़गी है। उनका कहना है कि रोज़ दिल दहल जाता है — कहीं कोई हादसा न हो जाए।
स्थानीय लोगों का साफ कहना है —
“अगर समय रहते व्यवस्था नहीं हुई तो बड़ी दुर्घटना तय है।”
संसद में उठा मुद्दा — नियम 377 के तहत रखी गई गंभीर चिंता
आंवला लोकसभा क्षेत्र से सांसद नीरज मौर्य (समाजवादी पार्टी) ने इस गंभीर स्थिति को लोकसभा में नियम 377 के तहत उठाया।
उन्होंने कहा:
“वैकल्पिक व्यवस्था के अभाव में आमजन और स्कूली बच्चों को रोज़ जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ रहा है। यह अत्यंत गंभीर विषय है। सरकार तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करे।”
सांसद ने मांग की कि ओवरब्रिज निर्माण पूरा होने तक कम से कम पैदल चलने के लिए सुरक्षित अस्थायी मार्ग तत्काल बनाया जाए।
व्यापार पर भी पड़ा असर
मुख्य रास्ता बंद होने से बाजार की रफ्तार धीमी पड़ गई है। दुकानदारों का कहना है कि ग्राहकों की आवाजाही कम हो गई है। छोटे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।
बड़े सवाल खड़े
क्या बिना वैकल्पिक व्यवस्था के मुख्य मार्ग बंद करना सही था?
क्या प्रशासन किसी हादसे के बाद ही जागेगा?
क्या रेलवे और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय की कमी है?
फिलहाल फरीदपुर में नाराज़गी बढ़ती जा रही है और लोग जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं।
अब नजरें सरकार पर
ओवरब्रिज निर्माण को विकास का प्रतीक माना जा रहा था, लेकिन अधूरी तैयारी ने इसे संकट में बदल दिया है। अब देखना यह है कि सरकार और संबंधित विभाग कितनी जल्दी हस्तक्षेप कर जनता को राहत देते हैं।




