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23/03/2026

आवास बांटने में खेल! फरीदपुर में गरीब महिलाओं को दरकिनार कर कागज़ों से की गई छेड़छाड़

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सत्यम गौड़। फरीदपुर


बरेली की फरीदपुर तहसील में प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार, दस्तावेजों में हेरफेर और प्रशासनिक मिलीभगत के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों के बाद योजना की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
        नगर क्षेत्र में आरोप है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास स्वीकृत कराने के लिए लाभार्थियों से 20 से 30 हजार रुपये तक का अवैध लेनदेन किया जा रहा है। इस कथित लेनदेन के चलते अपात्र व्यक्तियों को योजना का लाभ मिल रहा है, जबकि वास्तविक पात्र लाभार्थी—विशेषकर गरीब महिलाएं—आज भी कच्चे मकानों में रहने को मजबूर हैं।
       पीड़ित महिलाओं का कहना है कि उन्होंने करीब दो वर्ष पूर्व योजना के लिए आवेदन किया था, जो आज तक ऑनलाइन पोर्टल पर लंबित है। प्राथमिक जांच और पीड़ितों के बयानों से यह भी सामने आया है कि लाभार्थियों की आय, पारिवारिक स्थिति और आवासीय स्थिति का सत्यापन सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं किया गया। कई मामलों में बिना भौतिक सत्यापन के ही रिपोर्ट तैयार कर दी गई।
         लाभार्थी सूची में किए गए संशोधन के दौरान न तो कोई प्रस्ताव संलग्न पाया गया और न ही अनुमोदन अथवा कारण दर्शाने वाले दस्तावेज उपलब्ध हैं, जो गंभीर प्रशासनिक अनियमितता की ओर इशारा करता है।
       सोमवार को सितारा पत्नी सादिक, आमना पत्नी कुदरत अल्ला और शावजादी पत्नी मंसूर अली सहित कई महिलाएं नगर पालिका परिषद कार्यालय पहुंचीं और शिकायत दर्ज कराई। महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनके मोहल्ले में ऐसे लोगों को भी आवास स्वीकृत कर दिया गया है, जिनके पास पहले से पक्के मकान हैं, जबकि उन्होंने बाद में आवेदन किया था। इससे लाभार्थी चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
        महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2025-26 के पात्र-अपात्र की सूची की जानकारी मांगे जाने पर नगर पालिका के संबंधित लिपिक ने टालमटोल की और बाद में फोन उठाना भी बंद कर दिया।
      यह पूरा मामला शासकीय धन के  संभावित दुरुपयोग, सरकारी अभिलेखों में हेरफेर, रिश्वतखोरी और कर्तव्य में लापरवाही की श्रेणी में आता है। पीड़ितों ने मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच, लाभार्थी सूची का पुनः भौतिक सत्यापन तथा दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
       इस संबंध में अधिशासी अधिकारी पुनीत कुमार ने बताया कि लिपिक प्रदीप कुमार को मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, एसडीएम फरीदपुर मल्लिका नयन ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है और जांच कर शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।


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