बरेली में यात्री बसों से कथित माल ढुलाई का खेल? रिंकू टूर एंड ट्रेवल पर उठे सवाल, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर चर्चा तेज…
सत्यम गौड़। बरेली
बरेली में संचालित कुछ प्राइवेट यात्री बसों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर मिल रही शिकायतों और प्रत्यक्षदर्शियों के दावों के अनुसार, रिंकू टूर एंड ट्रेवल की कुछ प्राइवेट बसों में यात्रियों के साथ-साथ व्यावसायिक सामान भी बड़े पैमाने पर लोड किए जाने की बात सामने आई है।
आरोप यह है कि जिन बसों का परमिट यात्री परिवहन के लिए है, उनका उपयोग कथित रूप से माल ढुलाई के लिए किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है, लेकिन मामला सार्वजनिक चर्चा का विषय बनता जा रहा है।क्या है पूरा मामला?
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि बरेली से दूसरे राज्यों के लिए संचालित कुछ बसों में नियमित रूप से कार्टन, बड़े पैकेट और व्यावसायिक माल लादा जाता है। आरोप है कि यह गतिविधि बिना वैध गुड्स कैरियर परमिट के की जा रही है।कुछ यात्रियों ने भी नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बसों में सामान की मात्रा इतनी अधिक होती है कि सीटों के नीचे और पीछे के हिस्सों में माल भरा रहता है, जिससे असुविधा और सुरक्षा संबंधी चिंता पैदा होती है।इन दावों के बाद परिवहन विभाग की भूमिका और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
क्या कहता है कानून? मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत:धारा 66 के अनुसार, किसी भी वाहन को उसके परमिट की शर्तों के अनुसार ही संचालित किया जाना चाहिए।धारा 192A परमिट की शर्तों के उल्लंघन पर दंड का प्रावधान करती है।यदि कोई यात्री बस व्यावसायिक माल ढुलाई करती पाई जाती है, तो इसे परमिट उल्लंघन माना जा सकता है।इसके अलावा, यदि व्यावसायिक सामान बिना वैध दस्तावेज (जैसे ई-वे बिल) के एक राज्य से दूसरे राज्य ले जाया जाता है, तो जीएसटी अधिनियम के तहत भी कार्रवाई संभव है।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यात्री बसों में भारी मात्रा में माल लोड करना सुरक्षा मानकों के भी खिलाफ हो सकता है, विशेषकर लंबी दूरी की यात्रा के दौरान। प्रशासन की चुप्पी पर उठे प्रश्नस्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस तरह की गतिविधियां हो रही हैं तो परिवहन विभाग द्वारा नियमित जांच क्यों नहीं की जा रही?क्या विभाग को इसकी जानकारी नहीं है?क्या शिकायतें दर्ज कराई गईं और उन पर क्या कार्रवाई हुई?क्या हाल ही में किसी बस की जांच या चालान किया गया?
इन सवालों के जवाब फिलहाल स्पष्ट नहीं हैं। संबंधित विभाग से आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने का इंतजार है।




