महिला एवं बाल विकास विभाग के ट्रांसफर आदेश पर विवाद, महिला पर्यवेक्षकों ने उठाए सवाल; संशोधित आदेश जारी करने की मांग

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सारंगढ़-बिलाईगढ़। महिला एवं बाल विकास विभाग सारंगढ़-बिलाईगढ़ में जारी स्थानांतरण आदेश को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आदेश से प्रभावित महिला पर्यवेक्षकों की परेशानी, सुरक्षा और पारिवारिक जिम्मेदारियों को देखते हुए स्थानांतरण सूची पर पुनर्विचार करने की मांग की जा रही है।
मांग उठाई जा रही है कि स्थानांतरण करते समय केवल प्रशासनिक व्यवस्था ही नहीं, बल्कि महिला कर्मचारियों की सुरक्षा, आवागमन की सुविधा और पारिवारिक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाए। महिला कर्मचारी को अपनी ड्यूटी के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं। ऐसे में जिन महिला पर्यवेक्षकों को स्थानांतरण से गंभीर परेशानी हो रही है, उनके मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए संशोधित आदेश जारी किया जाना चाहिए।
स्थानांतरण प्रक्रिया में भेदभाव और अनियमितता के आरोप
विभागीय स्थानांतरण आदेश को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं कि प्रदेश के 33 जिलों में केवल सारंगढ़-बिलाईगढ़ में ही इस तरह की स्थानांतरण प्रक्रिया अपनाई गई है। आदेश में कुछ त्रुटियां होने की बात भी सामने आई है। उदाहरण के तौर पर लेंधरा परियोजना में किसी भी पर्यवेक्षक का सेक्टर परिवर्तन नहीं किया गया है, जबकि अन्य स्थानों पर बदलाव किए गए हैं।
वहीं भटगांव की एक पर्यवेक्षक के संबंध में आरोप है कि तीन वर्ष की निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही उनका तीन बार सेक्टर परिवर्तन किया गया है। बताया जा रहा है कि महज दो वर्षों में तीन बार सेक्टर बदलने से संबंधित कर्मचारी को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
आदेश क्रमांक 16 में लिपिकीय त्रुटि का आरोप
स्थानांतरण आदेश के क्रमांक 16 में पर्यवेक्षक बहतरीन चौहान का परियोजना बरमकेला एवं सेक्टर गोपालपुर उल्लेखित किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। इसे गंभीर लिपिकीय त्रुटि बताया जा रहा है। आरोप है कि संबंधित पर्यवेक्षक को पूर्व में अन्य विकासखंड से स्थानांतरित कर सारंगढ़ में पदस्थ किया गया था। ऐसे में वर्तमान आदेश में उनके पदस्थापना संबंधी विवरण को लेकर स्थिति स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता है।
इसके अलावा पर्यवेक्षकों की पदस्थापना अवधि और कार्यकाल का वर्ष गलत दर्शाकर नोटशीट तैयार किए जाने तथा मनमाने तरीके से आदेश जारी किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
संशोधित आदेश जारी करने की मांग
अब मांग की जा रही है कि महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी पूरे स्थानांतरण आदेश की निष्पक्ष जांच करें। पदस्थापना वर्ष, सेक्टर परिवर्तन, सेवा अवधि और आदेश में दर्ज लिपिकीय त्रुटियों का सत्यापन किया जाए। साथ ही प्रभावित महिला पर्यवेक्षकों की सुरक्षा एवं पारिवारिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए स्थानांतरण आदेश पर पुनर्विचार कर आवश्यक संशोधन किया जाए, ताकि कर्मचारियों के साथ न्याय हो सके और विभागीय कार्य भी सुचारू रूप से संचालित हो सके।



















