10/10/2026

CG NEWS: 3800 मेगावाट की तैयारी… क्या रायगढ़ बनेगा देश का ‘पावर हब’ या प्रदूषण का नया केंद्र? जनसुनवाई से पहले उठे बड़े सवाल….

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रायगढ़। छत्तीसगढ़ का रायगढ़ एक बार फिर विकास बनाम पर्यावरण की बहस के केंद्र में है। अदानी पावर लिमिटेड अपने मौजूदा 2200 मेगावाट के ताप विद्युत संयंत्र का विस्तार कर इसे 3800 मेगावाट तक ले जाने की तैयारी में है। प्रस्तावित 1600 मेगावाट (2×800 MW) विस्तार को लेकर जल्द जनसुनवाई होनी है, लेकिन उससे पहले स्थानीय लोगों के बीच कई गंभीर सवाल गूंजने लगे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब देश में बिजली उत्पादन क्षमता लगातार बढ़ रही है और बिजली की कमी पहले जैसी नहीं रही, तब रायगढ़ पर एक और विशाल कोयला आधारित परियोजना का बोझ क्यों डाला जा रहा है?

परियोजना के दस्तावेज बताते हैं कि विस्तार के बाद हर साल करीब 16.52 मिलियन टन कोयले की खपत होगी, 82 एमसीएम पानी की जरूरत पड़ेगी और लगभग 6.298 मिलियन टन फ्लाई ऐश व बॉटम ऐश उत्पन्न होगी। कंपनी का दावा है कि फ्लाई ऐश का 100 प्रतिशत उपयोग किया जाएगा, लेकिन जिले के कई इलाकों में खुले में पड़ी राख, खेतों और नालों तक पहुंची फ्लाई ऐश तथा उड़ती धूल इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के दौरान राख खेतों तक पहुंच जाती है, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता और फसल उत्पादन प्रभावित होता है। कई जगह जल स्रोतों के दूषित होने और हवा में राख के कणों से लोगों को सांस, आंख और त्वचा संबंधी परेशानियों की शिकायतें भी लंबे समय से सामने आती रही हैं।

दस्तावेजों के अनुसार इस विस्तार के लिए करीब 185 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि का उपयोग होगा। महानदी से अतिरिक्त पानी लिया जाएगा और कोयले के परिवहन में भी भारी बढ़ोतरी होगी। इससे ट्रकों की आवाजाही, धूल, शोर और औद्योगिक दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही नवीकरणीय ऊर्जा के बीच कोयला आधारित उत्पादन क्षमता बढ़ाने के फैसले पर भी सवाल उठ रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि विकास के साथ पर्यावरणीय जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।

जनसुनवाई में गूंज सकते हैं ये बड़े सवाल

– जब देश में बिजली की कमी लगभग समाप्त हो चुकी है, तब रायगढ़ में ही नया कोयला आधारित विस्तार क्यों?
– यदि फ्लाई ऐश का 100 प्रतिशत उपयोग हो रहा है, तो खुले में दिखाई देने वाली राख किसकी है?
– वर्तमान संयंत्र के प्रदूषण और पर्यावरणीय अनुपालन का स्वतंत्र ऑडिट क्यों नहीं?
– अतिरिक्त राख, पानी और कोयले के सुरक्षित प्रबंधन की क्या ठोस व्यवस्था है?
– क्या विकास का पूरा पर्यावरणीय बोझ सिर्फ रायगढ़ के ग्रामीणों और किसानों को ही उठाना होगा?

रायगढ़ की यह जनसुनवाई केवल एक औद्योगिक परियोजना की मंजूरी तक सीमित नहीं है। यह उस विकास मॉडल की परीक्षा भी होगी, जिसमें उद्योगों के वादों और जमीन पर दिख रही वास्तविकताओं का आमना-सामना होगा। अब लोगों की मांग केवल नए आश्वासनों की नहीं, बल्कि पुराने वादों के हिसाब और भविष्य की स्पष्ट जवाबदेही की है।


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