बुदबुदा पंचायत में जांच के दौरान बड़ा खुलासा: सरपंच ने कहा- “पंचायत का काम मेरा बेटा संभालता है”, जांच पर उठे सवाल..
(भुनेश्वर निराला) आवाम की आवाज़ न्यूज़ |सारंगढ़
बरमकेला/सारंगढ़-बिलाईगढ़। ग्राम पंचायत बुदबुदा में 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग को लेकर हुई जिला स्तरीय जांच उस समय चर्चा का विषय बन गई, जब जांच के दौरान महिला सरपंच ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि पंचायत के कार्यों का संचालन उनके पुत्र द्वारा किया जाता है। इस बयान के सामने आने के बाद ग्रामीणों के बीच पंचायत संचालन की वैधानिकता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छिड़ गई है।
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत बुदबुदा में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर सोमवार को पंचायत भवन में जांच आयोजित की गई। शिकायतकर्ता हेमंत कुमार पटेल ने 15वें वित्त आयोग की राशि के खर्च और विकास कार्यों में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग की थी।
जांच के बीच सरपंच का बयान बना चर्चा का विषय
जांच प्रक्रिया के दौरान मौजूद ग्रामीणों के अनुसार, महिला सरपंच लक्ष्मी पटेल ने अधिकारियों के समक्ष कहा कि पंचायत के अधिकांश कार्यों का संचालन उनका पुत्र करता है। यह बात सामने आते ही पंचायत भवन में मौजूद लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्वाचित प्रतिनिधि के स्थान पर कोई अन्य व्यक्ति निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
तय समय से देर से पहुंची जांच टीम
ग्रामीणों ने जांच टीम के निर्धारित समय से देर से पहुंचने पर भी नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि जांच की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को अधिक तत्परता दिखानी चाहिए थी। पंचायत भवन में दस्तावेजों के रखरखाव और अभिलेखों की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए।
ये अधिकारी रहे मौजूद
जांच के दौरान जिला पंचायत एवं संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। इनमें उप संचालक पंचायत, लेखा अधिकारी तथा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के अधिकारी शामिल थे। पंचायत सचिव, पंच और बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर उपस्थित रहे।
शिकायतकर्ता ने की निष्पक्ष जांच की मांग
शिकायतकर्ता हेमंत कुमार पटेल का कहना है कि पंचायत में हुए खर्चों और विकास कार्यों की गहन जांच की जानी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। उनका आरोप है कि यदि जांच केवल औपचारिकता बनकर रह गई, तो ग्रामीणों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर होगा।
ग्रामीणों में बढ़ा असंतोष
मामले को लेकर गांव के कई लोगों ने पारदर्शी जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत जनता की संस्था है और इसके संचालन में किसी भी प्रकार की अनियमितता या बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल जांच टीम को निर्धारित समयावधि में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है। अब सबकी नजर जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है कि रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।
(नोट: आरोपों और बयानों की स्वतंत्र पुष्टि प्रशासनिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही संभव होगी।)









