तमनार बना आस्था का महासागर! विष्णु महायज्ञ में उमड़ा जनसैलाब, CM की बड़ी घोषणा से दोगुनी हुई खुशी…
आवाम की आवाज़ न्यूज़//भुनेश्वर निराला
रायगढ़। तमनार की पावन धरती पर ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता को एक ही मंच पर जीवंत कर दिया। छत्तीसगढ़ वैष्णव महासभा के तत्वाधान में आयोजित ‘विष्णु महायज्ञ एवं बटुक संस्कार’ सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह पूरे प्रदेश के वैष्णव समाज की ताकत और एकजुटता का विराट प्रदर्शन बन गया।
एक आह्वान और उमड़ पड़ा पूरा छत्तीसगढ़
राष्ट्रीय महासचिव लखन दास वैष्णव के एक संदेश ने ऐसा असर दिखाया कि प्रदेश के कोने-कोने से समाज के पदाधिकारी और श्रद्धालु तमनार पहुंच गए। हजारों की भीड़, जयकारों की गूंज और वेद मंत्रों के बीच माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आया।
CM की बड़ी घोषणा ने बदला माहौल
कार्यक्रम के दौरान सबसे बड़ी खबर तब सामने आई, जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने समाज के लिए बड़ा तोहफा दे दिया।
सांसद राधेश्याम राठिया के निवेदन पर समाज भवन निर्माण के लिए 20 लाख रुपये देने की घोषणा की गई।
इतना ही नहीं, स्थानीय स्तर पर 5 डिसमिल जमीन दान का संकल्प भी लिया गया—जिससे समाज में खुशी की लहर दौड़ गई।
“वैष्णव समाज मेरे गुरु भाई जैसा” — सांसद का भावुक बयान
कार्यक्रम में पहुंचे सांसद राधेश्याम राठिया ने समाज के साथ अपने गहरे रिश्ते को साझा करते हुए कहा कि उन्हें वैष्णव समाज से विशेष आध्यात्मिक जुड़ाव है। उनका यह बयान लोगों के दिल को छू गया।
संस्कारों का जीवंत दर्शन बना बटुक संस्कार
महायज्ञ के बीच आयोजित बटुक संस्कार ने आयोजन को और खास बना दिया। वैदिक मंत्रों की गूंज और यज्ञ की आहुतियों के बीच यह संस्कार नई पीढ़ी को परंपराओं से जोड़ने का मजबूत संदेश बनकर उभरा।
समाज को मिला बड़ा संदेश
मंच से नेताओं और वक्ताओं ने एकजुटता, शिक्षा और संस्कार को समाज की सबसे बड़ी ताकत बताया।
प्रदेश मीडिया प्रभारी जगन्नाथ बैरागी ने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और उन्हें अपनी पहचान समझने का मौका देते हैं।
विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी ने बढ़ाई शान
कार्यक्रम में प्रदेशभर से आए सैकड़ों पदाधिकारी और समाज के प्रमुख चेहरों की मौजूदगी ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। हर ओर एक ही संदेश गूंजता रहा—एकता ही शक्ति है।
आस्था से संगठन तक—तमनार ने रचा इतिहास
यह आयोजन सिर्फ धार्मिक नहीं रहा, बल्कि इसने छत्तीसगढ़ में वैष्णव समाज की ताकत, संगठन और प्रभाव को भी मजबूती से सामने रखा।
कुल मिलाकर, तमनार का यह महायज्ञ अब एक ऐतिहासिक मिसाल बन चुका है—जहां आस्था के साथ-साथ समाज की शक्ति का भी भव्य प्रदर्शन देखने को मिला।










