अवैध निर्माण उजागर करने पर पत्रकार को जान से मारने की धमकी, प्रशासनिक निष्क्रियता पर उठे गंभीर सवाल
चांपा (जिला जांजगीर-चांपा)। शहर के वार्ड क्रमांक 26, छुईहा तालाब नया कॉलेज रोड क्षेत्र में वर्षों से बिना अनुमति संचालित अवैध निर्माण का मामला अब गंभीर रूप ले चुका है। सीमेंट से बने गमले, खंभे (पोल) और जाली निर्माण का यह कथित अवैध कारोबार न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि अब यह मामला कानून-व्यवस्था और पत्रकार सुरक्षा से भी जुड़ गया है।
स्थानीय पत्रकार मनीराम आजाद द्वारा इस अवैध निर्माण और बिना शासकीय अनुमति के चल रहे कार्यों का समाचार प्रकाशित किए जाने के बाद स्थिति और बिगड़ गई। पत्रकार ने अपने आवेदन में स्पष्ट उल्लेख किया है कि खबर प्रकाशित होते ही संबंधित आरोपियों विष्णु रात्रे एवं राजकुमारी रात्रे द्वारा उन्हें और उनके परिवार को गाली-गलौज करते हुए जान से मारने एवं अन्य लोगों से मरवाने की धमकी दी गई।
पत्रकार मनीराम आजाद ने इस संबंध में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) चांपा तथा थाना प्रभारी चांपा को लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे मामले की जानकारी दी है। आवेदन में उन्होंने बताया कि वे वार्ड क्रमांक 26 के निवासी हैं और स्वतंत्र पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। उनके द्वारा प्रकाशित समाचार में अवैध रूप से सीमेंट गमले, जाली और खंभों का निर्माण बिना किसी वैध अनुमति के किए जाने का खुलासा किया गया था।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपियों द्वारा लगातार अश्लील गालियां दी जा रही हैं और जान से मारने की धमकी दी जा रही है, जिससे उनका पूरा परिवार भयभीत और दहशत में है। पत्रकार ने यह भी चेतावनी दी है कि भविष्य में उनके या उनके परिवार के साथ कोई अप्रिय घटना घटित होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित आरोपियों की होगी।
*ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सौंपी गई*

मामले को गंभीरता से लेते हुए पत्रकार ने धमकी से संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी थाना प्रभारी के व्हाट्सएप नंबर पर भेजी है, जिससे आरोपों की पुष्टि हो सके। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
*अवैध निर्माण और रेत परिवहन पर भी उठे सवाल*
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, उक्त क्षेत्र में लंबे समय से सड़क किनारे ही सीमेंट गमले और खंभों का निर्माण खुलेआम किया जा रहा है। इसके लिए न तो कोई अनुमति ली गई है और न ही किसी प्रकार का वैध बिल प्रस्तुत किया जा रहा है। साथ ही निर्माण में उपयोग हो रही रेत भी अवैध रूप से लाकर डंप की जा रही है, जिससे खनिज विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
लोगों का कहना है कि इस प्रकार के अवैध कारोबार से शासन को राजस्व की भारी हानि हो रही है और टैक्स चोरी की आशंका भी बनी हुई है, लेकिन संबंधित विभाग पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रहे हैं।
*पत्रकार सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल*
समाचार प्रकाशित करने के बाद पत्रकार को खुलेआम धमकी मिलना न केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक तंत्र की संवेदनशीलता पर भी प्रश्न खड़ा करता है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि पत्रकार ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा की कल्पना करना भी मुश्किल है।
यह मामला अब केवल अवैध निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह प्रशासनिक निष्क्रियता, संभावित मिलीभगत और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे प्रकरण में कब तक मौन रहता है और कब ठोस एवं प्रभावी कार्रवाई करता है।









