मवई नदी के अस्तित्व पर मंडराया संकट, ‘अटल प्रगति न्यूज़’ की खबर के बाद जागा जन-आक्रोश
जनकपुर-हरचोका में रेत माफियाओं के खिलाफ ग्रामीणों का हल्ला बोल; प्रशासन को 8 बिंदुओं का अल्टीमेटम, दी भूख हड़ताल की चेतावनी
जनकपुर/भरतपुर (MCB) | ब्यूरो रिपोर्ट:
छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले के वनांचल क्षेत्र भरतपुर में बहने वाली जीवनदायिनी मवई नदी इन दिनों रेत माफियाओं के चंगुल में है। अटल प्रगति न्यूज़ द्वारा इस अवैध कारोबार का पर्दाफाश किए जाने के बाद अब जनकपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत हरचोका के ग्रामीण अपनी चुप्पी तोड़कर सड़क पर उतर आए हैं। ग्रामीणों ने आज तहसीलदार और अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को एक लिखित शिकायत पत्र सौंपते हुए अवैध रेत खदानों को तत्काल प्रभाव से बंद करने की मांग की है।
नदी का सीना छलनी, गांव की प्यास बढ़ी
ग्रामीणों ने अपने शिकायती पत्र में दर्द बयान करते हुए कहा कि मवई नदी से दिन-रात हो रहे रेत के अवैध उत्खनन ने जल स्तर को पाताल में पहुँचा दिया है। मां सीतामढ़ी निर्मल घाट की सीढ़ियों से पानी इतना नीचे चला गया है कि उसे मीटर से नापा जा सकता है। लगातार हो रही खुदाई के कारण गांव के कुएं और कृषि कार्य के लिए लगाए गए बोरबेल पूरी तरह सूख चुके हैं। श्याम नारायण शर्मा जैसे कई किसानों के बोर मौके पर दम तोड़ चुके हैं, जिससे किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है।
रामवनगमन पथ और जर्जर पुल: विकास पर माफिया का ग्रहण
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि रामवनगमन पथ के किनारे शासन द्वारा लगाए गए कीमती वृक्ष डंपरों से उड़ने वाली धूल की वजह से दम तोड़ रहे हैं। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत बनी सड़कें भारी वाहनों के दबाव से गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मवई नदी पर बना मुख्य पुल अब मौत का जाल बन चुका है। डंपरों के बोझ से पुल की छड़ें (iron rods) बाहर निकल आई हैं, जो किसी भी बड़े हादसे को न्योता दे रही हैं।
शिक्षा बाधित और मवेशियों की मौत का तांडव
रेत परिवहन में लगे डंपरों के शोर (ध्वनि प्रदूषण) ने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई को नरक बना दिया है। वहीं, नदी में बेतरतीब ढंग से किए गए गहरे गड्ढों में रेत भर जाने से मवेशी उसमें फंसकर मर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि ये गड्ढे बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी ‘डेथ ट्रैप’ साबित हो रहे हैं।
अंतिम चेतावनी: “अब आर-पार की लड़ाई”
ग्राम पंचायत हरचोका के सरपंच और समस्त ग्रामवासियों ने हस्ताक्षर युक्त ज्ञापन में स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही अवैध रेत खदानों पर ताला नहीं लटका, तो पूरा गांव सामूहिक भूख हड़ताल पर बैठने को मजबूर होगा। ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि इस दौरान होने वाली किसी भी अप्रिय घटना या जनहानि की संपूर्ण जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।
मुख्य बिंदु जो पत्र में उठाए गए:
जल संकट: मीटरों से नापा जा सकता है गिरा हुआ जल स्तर।
धार्मिक आस्था: सीतामढ़ी और रामवनगमन पथ की गरिमा को ठेस।
सड़क बर्बादी: मुख्यमंत्री के आगमन पर सुधरी सड़कें फिर हुई जर्जर।
पुल का खतरा: कभी भी गिर सकता है नदी का मुख्य पुल।
भूख हड़ताल: प्रशासन की चुप्पी के खिलाफ अंतिम हथियार।
अटल प्रगति न्यूज़ की कलम से:
हमारा उद्देश्य केवल खबर दिखाना नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं को अंजाम तक पहुँचाना है। हरचोका के ग्रामीणों की यह एकजुटता इस बात का प्रमाण है कि अब जनता अपने हक और अपनी प्राकृतिक संपदा को लुटते हुए नहीं देखेगी।






