मौत के साए में चलता खनन, भुता में कानून से बेखौफ डंपर…
▪️हादसे के बाद भी जारी काम ने खोली प्रशासनिक लापरवाही की परतें
सत्यम गौड़। फरीदपुर
बरेली जनपद के थाना भुता क्षेत्र में खनन अब केवल नियमों की अनदेखी नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे तौर पर मानव जीवन के लिए खतरा बनता जा रहा है। खनन कार्य में लगे एक डंपर से हुए दर्दनाक सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौत और दो अन्य के गंभीर रूप से घायल होने की घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया, लेकिन इसके बावजूद खनन का काम दोबारा शुरू कर दिया गया, जिससे प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गहरा सवाल खड़ा हो गया है।
हादसे के बाद पीड़ित परिवार जहां गहरे सदमे में है, वहीं इलाके में खनन का दोबारा शुरू होना आम लोगों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक जान जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई सख्त संदेश नहीं दिया गया, न तो खनन पर प्रभावी रोक दिखी और न ही जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई सामने आई। इससे खनन से जुड़े लोगों के हौसले और बुलंद होते नजर आ रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार भुता क्षेत्र में खनन का काम शिव कुमार गंगवार और मोहित कुमार द्वारा कराया जा रहा है। आरोप है कि हादसे के बाद भी भारी डंपर और खनन वाहन उसी तरह सड़कों पर दौड़ते रहे, जैसे कुछ हुआ ही न हो। ग्रामीणों का कहना है कि डंपरों की तेज रफ्तार और लापरवाह आवाजाही से पूरा इलाका दहशत में है और लोग हर समय किसी नई अनहोनी की आशंका के साथ घर से निकलते हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि खनन क्षेत्र में सुरक्षा मानकों का नामोनिशान तक नहीं है। न तो वाहनों की गति पर नियंत्रण है, न ही तय मार्गों का पालन किया जा रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों को रोज़ मौत के साए में सफर करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि पहले भी कई बार डंपरों की वजह से हादसे होते-होते बचे हैं, लेकिन हर बार मामला दबा दिया गया और खनन का खेल चलता रहा।
इस पूरे घटनाक्रम ने खनन विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। हादसे के बाद भी खनन का दोबारा शुरू होना यह दिखाता है कि या तो नियमों की अनदेखी जानबूझकर की जा रही है या फिर खनन माफिया के सामने प्रशासन खुद को असहाय महसूस कर रहा है। क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि जब मौत के बाद भी खनन नहीं रुकता, तो आम जनता की सुरक्षा आखिर किसके भरोसे है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक चुप्पी ने खनन माफिया को खुली छूट दे रखी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में हालात और भयावह हो सकते हैं और हादसों की यह श्रृंखला थमने वाली नहीं है। मानव जीवन की कीमत यहां सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित होकर रह गई है, जबकि जमीनी हकीकत लगातार डराने वाली बनती जा रही है।
फिलहाल भुता क्षेत्र में लोगों का आक्रोश साफ दिखाई दे रहा है। क्षेत्रीय जनता खनन पर तत्काल रोक, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग कर रही है। यह मामला अब केवल एक हादसा नहीं रह गया है, बल्कि अवैध खनन, प्रशासनिक लापरवाही और आम जनता की अनदेखी का प्रतीक बन चुका है।


