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06/02/2026

महिला अस्पताल बरेली में एम्बुलेंस बनी दवा ढोने का साधन…

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सत्यम गौड़। बरेली

➡️ एम्बुलेंस से दवाइयों की ढुलाई
➡️ प्रसव मरीज परेशान, रेफर पर वाहन नहीं
➡️ जाम से देरी, कार्रवाई की मांग

बरेली जिला महिला अस्पताल में मरीजों की एम्बुलेंस को दवाइयाँ ढोने में लगाया जा रहा है, जिससे गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों की जान जोखिम में पड़ गई है।

जिला महिला अस्पताल में हालात इतने दयनीय हो चुके हैं कि अब एम्बुलेंस का इस्तेमाल दवाइयाँ ढोने के लिए किया जा रहा है। जी हाँ, वही एम्बुलेंस जो गर्भवती महिलाओं, प्रसव पीड़ा में तड़पती माताओं और गंभीर मरीजों को तुरंत अस्पताल पहुँचाने के लिए बनी हैं—अब वो दवा की गोलियों, सिरप और इंजेक्शनों का सामान ढोने का काम कर रही हैं!

सवाल यह है? क्या स्वास्थ्य विभाग के पास इतनी ताकत नहीं कि एक साधारण वाहन या ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था कर सके? या फिर यह जानबूझकर की जा रही प्रशासनिक लापरवाही है, जिसका खामियाजा गरीब मरीजों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है?
प्रसव के लिए आने वाली महिलाएँ घंटों इंतजार करती हैं।गंभीर हालत में रेफर किए जाने पर एम्बुलेंस नहीं मिलती, परिवार को मजबूरन प्राइवेट वाहन का सहारा लेना पड़ता है।पहले से ही बरेली के जिला अस्पताल रोड पर अतिक्रमण के चलते एम्बुलेंस 500 मीटर की दूरी तय करने में 15-20 मिनट लगा देती हैं-और अब तो एम्बुलेंस खुद दवाइयाँ लाने-ले जाने में व्यस्त! स्वास्थ्य विभाग की दोहरी मार
         यह कोई पहला मामला नहीं है। बरेली में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पुरानी है। एम्बुलेंस चालकों की हड़ताल हो, डीजल की कमी हो, या फिर रास्ते में जाम, हर बार मरीजों की जान दाँव पर लग जाती है। लेकिन जिला महिला अस्पताल में एम्बुलेंस को दवा ट्रांसपोर्ट का काम सौंपना शायद अब तक की सबसे शर्मनाक घटना है।

क्या यह लापरवाही है या सिस्टमेटिक फेल्योर?

क्या स्वास्थ्य मंत्री और जिलाधिकारी को पता नहीं कि उनकी सबसे महत्वपूर्ण महिला अस्पताल में एम्बुलेंस दवाइयाँ ढो रही हैं, जबकि मरीज तड़प रहे हैं? यह समय है सख्त कार्रवाई का!तत्काल एम्बुलेंस की संख्या बढ़ाई जाए।दवा सप्लाई के लिए अलग व्यवस्था की जाए।जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।बरेली की माताएँ और महिलाएँ अब और इंतजार नहीं कर सकतीं। उनकी जान की कीमत पर प्रशासन की यह मजाकिया लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी! 


स्वास्थ्य विभाग जागो! मरीजों की एम्बुलेंस लौटाओ, दवाइयों का बोझ उतारो—वरना ये शर्मिंदगी हमेशा आपके माथे पर रहेगी।


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