आवारा पशुओं की समस्या पर हाहाकार, मंत्री जी की चुप्पी से जनता नाराज…

सत्यम गौड़। फरीदपुर
बरेली से शाहजहांपुर तक आवारा पशुओं की समस्या चरम पर है। प्रदेश सरकार ने पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्रालय की जिम्मेदारी बरेली के आंवला तहसील निवासी मंत्री धर्मपाल सिंह को सौंपी है, लेकिन जमीनी हालात बदतर हैं। सड़कों पर भूख-प्यास से तड़पती, बीमार और घायल गायें भटक रही हैं। किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं और आवारा पशुओं के कारण सड़क हादसे बढ़ रहे हैं।

कागजों पर गौशालाओं के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन सड़कों पर हजारों गायें और बैल खुले में घूम रहे हैं। कूड़े के ढेर में भोजन तलाशती गायें जिम्मेदारों की निष्क्रियता को उजागर कर रही हैं। हाल ही में बरेली के फरीदपुर तहसील के सलेमपुर गांव का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें गायें गंभीर रूप से घायल दिख रही हैं। ऐसे मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, लेकिन न प्रशासन ने ध्यान दिया, न ही मंत्री की ओर से कोई ठोस कदम उठा।

स्थानीय गौसेवक निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? जनता सवाल उठा रही है- लाखों की लागत से बनी गौशालाएं कहां हैं? सड़कों पर भटकने वाले पशु कौन हैं? हादसों और फसलों की बर्बादी का जिम्मेदार कौन? सबसे बड़ा सवाल- क्या मंत्री को सिर्फ पद मिला है या जिम्मेदारी भी? जनता जवाब मांग रही है।





