नकटी विस्थापन पर सियासत तेज: कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन, CM का पुतला दहन कर पुनर्वास की उठाई मांग
बिलासपुर। नकटी गांव में विस्थापन की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक हलचल लगातार बढ़ती जा रही है। प्रभावित परिवारों के समर्थन में शुक्रवार को जिला कांग्रेस कमेटी ने नेहरू चौक पर जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का पुतला दहन किया और विस्थापित परिवारों के सम्मानजनक पुनर्वास, उचित मुआवजा तथा मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। नेताओं का आरोप था कि प्रशासन की कार्रवाई के चलते कई परिवार बेघर हो गए हैं और उनके सामने आवास, रोजगार तथा दैनिक जीवन से जुड़ी गंभीर समस्याएं खड़ी हो गई हैं। उनका कहना था कि किसी भी विस्थापन से पहले प्रभावित लोगों के पुनर्वास की पूरी व्यवस्था करना सरकार की जिम्मेदारी है।
सभा को संबोधित करते हुए शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस हमेशा आम जनता के अधिकारों की लड़ाई लड़ती रही है और नकटी के प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए पार्टी हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि जब तक लोगों का सम्मानजनक पुनर्वास नहीं हो जाता, आंदोलन थमेगा नहीं।
ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री ने कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था के लोगों को बेघर करना मानवीय संवेदनाओं के खिलाफ है। उन्होंने सरकार से तत्काल आवास, उचित मुआवजा और सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
पूर्व विधायक शैलेश पांडेय ने कहा कि नकटी का मामला केवल एक गांव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम नागरिकों के अधिकार, सम्मान और न्याय से जुड़ा विषय है। वहीं वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद नायक ने कहा कि प्रभावित लोगों की बात सुने बिना की गई कार्रवाई लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं मानी जा सकती और सरकार को इस पूरे मामले पर संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज भी नकटी गांव पहुंचकर प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर चुके हैं तथा उन्हें हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया है।
प्रदर्शन के समापन पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का पुतला दहन कर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पार्टी ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में और व्यापक रूप दिया जाएगा।













