रायगढ़: नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में 19 वर्षीय युवक गिरफ्तार, जेल भेजा गया

लैलूंगा। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में नाबालिग बालिका से जुड़े कथित यौन शोषण के मामले में लैलूंगा पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी को अपराध दर्ज होने के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए 24 घंटे के भीतर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। यह कार्रवाई महिला एवं बालिका संबंधी अपराधों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान ‘संवेदना’ के तहत की गई।
शादी का भरोसा देकर शोषण करने का आरोप
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मामले की शिकायत पीड़िता की मां ने दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि फरवरी 2025 में उनकी बेटी गांव के जंगल में मवेशी चराने गई थी। घर लौटने के बाद उसने परिजनों को बताया कि पास के गांव के संजय यादव ने उसके साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए।
शिकायत के मुताबिक, आरोपी ने बालिका से शादी करने और उसे पत्नी के रूप में रखने का भरोसा दिया था। आरोप है कि इसके बाद वह उसे अपने साथ ले गया और करीब छह महीने तक उसका शारीरिक शोषण करता रहा। परिजनों द्वारा समझाइश दिए जाने के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं होने पर मामले की शिकायत पुलिस से की गई।
पॉक्सो एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज
पीड़िता की मां की शिकायत पर लैलूंगा थाने में अपराध क्रमांक 329/2026 दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(m) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 4 एवं 6 के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता की उम्र की पुष्टि के लिए जन्म प्रमाण पत्र जब्त किया और उसका चिकित्सकीय परीक्षण कराया। इसके बाद संजय यादव (19 वर्ष) को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। वहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
इस मामले में रायगढ़ एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार सोनी के मार्गदर्शन और धरमजयगढ़ एसडीओपी सिद्धांत तिवारी के पर्यवेक्षण में कार्रवाई की गई।
पुलिस टीम में लैलूंगा थाना प्रभारी उपनिरीक्षक गिरधारी साव, प्रशिक्षु उपनिरीक्षक प्रीतम बघेल, प्रशिक्षु उपनिरीक्षक शुभम मिश्रा, प्रधान आरक्षक जयशरण चंद्रा और आरक्षक सुमित एक्का शामिल रहे।
आवाम की आवाज़ न्यूज़ | रायगढ़, छत्तीसगढ़
नोट: आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोप पुलिस की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं। मामले में दोषसिद्धि न्यायालय के निर्णय के अधीन है।
















