कोयले की धूल से घुट रहा जीवन: सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर, साइडिंग बंद कराने अनिश्चितकालीन धरना शुरू…
(भुनेश्वर निराला) आवाम की आवाज़ न्यूज़|सारंगढ़
कोरबा। कोयले की उड़ती धूल से परेशान ग्रामीणों का सब्र आखिरकार जवाब दे गया। वर्षों से प्रदूषण की मार झेल रहे लोगों ने सोमवार को पंखा दफाई रेलवे फाटक के पास मोर्चा खोलते हुए अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि सुराकछार रेलवे साइडिंग से लगातार उड़ रही कोयले की महीन धूल ने आसपास के कई गांवों में रहना मुश्किल कर दिया है।
धरना स्थल पर जुटे सैकड़ों लोगों ने “धूल मुक्त गांव, स्वस्थ जीवन” के नारे लगाते हुए प्रशासन और प्रबंधन के खिलाफ जमकर नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रेम नगर, पंखा दफाई, भेरोताल, सुराकछार और भक्त दफाई सहित कई बस्तियां कोयले की धूल की चपेट में हैं। हालत यह है कि घरों की छतें, आंगन, कपड़े और खाने-पीने की चीजें तक काली धूल से ढंक जाती हैं।
सांस लेना हुआ मुश्किल, बढ़ रहीं बीमारियां
ग्रामीणों का कहना है कि प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। लगातार खांसी, सांस फूलना, आंखों में जलन और दमा जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत और ज्ञापन देने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी
धरने का नेतृत्व कर रहे स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा है कि जब तक प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी व्यवस्था लागू नहीं की जाती, आंदोलन समाप्त नहीं होगा। प्रदर्शनकारियों ने रेलवे साइडिंग में 24 घंटे वाटर स्प्रिंकलर, मिस्ट गन और फॉग कैनन चलाने के साथ-साथ कोयला लोडिंग की वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग उठाई है।
प्रशासन पहुंचा, लेकिन नहीं बनी बात
धरने की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों से चर्चा की। हालांकि प्रदर्शनकारी लिखित आश्वासन मिलने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर कार्रवाई चाहिए।
विशेषज्ञों की चेतावनी
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार कोयले की धूल में मौजूद सूक्ष्म कण लंबे समय तक शरीर में पहुंचने पर फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे दमा, COPD और अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित प्रबंधन की होगी।









