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04/06/2026

निस्तारी तालाब में मुरूम उत्खनन पर उठे सवाल।…

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रिपोर्टर _ दिलीप वर्मा

बलौदा बाजार जिला , सिमगा  तहसील क्षेत्र के ग्राम खिलोरा में निस्तारी तालाब को फोड़कर किए जा रहे कथित मुरूम उत्खनन को लेकर ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों और खनिज विभाग के बीच गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जहां एक ओर उत्खननकर्ता का दावा है कि ग्राम पंचायत के प्रस्ताव और खनिज विभाग की अनुमति के बाद विधिवत रॉयल्टी जमा कर उत्खनन किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का आरोप है कि इस संबंध में ग्राम पंचायत द्वारा कोई वैध प्रस्ताव पारित ही नहीं किया गया।
मामले की जानकारी मिलने पर पत्रकारों की टीम ने मौके का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान आधा दर्जन से अधिक हाइवा वाहनों के माध्यम से दिन-रात मुरूम परिवहन होते देखा गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि निस्तारी तालाब गांव की सार्वजनिक संपत्ति है, जिसका उपयोग वर्षों से ग्रामीणों द्वारा जल संग्रहण एवं अन्य आवश्यक कार्यों के लिए किया जाता रहा है। ऐसे में तालाब को क्षति पहुंचाकर मुरूम निकाले जाने से ग्रामीणों में नाराजगी व्याप्त है।
मौके पर परिवहन से संबंधित दस्तावेजों की जानकारी लेने पर यह भी देखने को मिला कि कुछ वाहनों के लिए रॉयल्टी संबंधी रसीदें प्रदर्शित की जा रही थीं, जबकि अन्य वाहनों में ऐसे दस्तावेज उपलब्ध नहीं दिखे। ग्रामीणों का आरोप है कि एक ही रसीद का बार-बार उपयोग कर परिवहन किया जा रहा है। हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है।
इस संबंध में खनिज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि संबंधित खननकर्ता को चार माह की अवधि के लिए लगभग 18 हजार घनमीटर मुरूम उत्खनन एवं परिवहन की अनुमति प्रदान की गई है तथा नियमानुसार रॉयल्टी जमा की गई है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि प्रत्येक वाहन में कौन-सी रसीद प्रदर्शित की जा रही है अथवा उसका उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है, यह संचालनकर्ता की जिम्मेदारी है।
यहीं से कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े होते हैं। छत्तीसगढ़ में लघु खनिजों के उत्खनन एवं परिवहन के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार खनिज का परिवहन वैध दस्तावेजों एवं स्वीकृत मात्रा के अनुरूप होना आवश्यक है। यदि पंचायत प्रस्ताव को लेकर विवाद है, तो उसकी सत्यता की जांच आवश्यक है। इसी प्रकार यदि एक ही परिवहन दस्तावेज का बार-बार उपयोग किया जा रहा है या परिवहन की वास्तविक मात्रा और स्वीकृत मात्रा में अंतर है, तो इसकी भी निष्पक्ष जांच अपेक्षित है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, खनिज विभाग तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि निस्तारी तालाब को नुकसान पहुंचाकर उत्खनन किया गया है अथवा पंचायत की सहमति संबंधी दस्तावेजों में कोई अनियमितता हुई है, तो दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और ग्राम खिलोरा के निस्तारी तालाब से जुड़े इस विवाद की सच्चाई जांच के बाद किस रूप में सामने आती है।
यह स्क्रिप्ट समाचार की भाषा में है और आरोपों को आरोप के रूप में ही प्रस्तुत करती है, जिससे रिपोर्ट तथ्यात्मक और कानूनी रूप से संतुलित बनी रहती है।


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