45 साल पुरानी जमीन पर कब्जे का आरोप: खेती करने वाला परिवार अब न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर…
बिलासपुर के पचपेड़ी थाना क्षेत्र से जमीन विवाद का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने ग्रामीणों के बीच हलचल मचा दी है। एक परिवार का आरोप है कि जिस जमीन पर वे दशकों से खेती करते आ रहे थे, उसी जमीन का रिकॉर्ड अचानक दूसरे लोगों के नाम पर दर्ज हो गया। अब पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लेकर पुलिस और प्रशासन के चक्कर काट रहा है।
मुरकुण्या गांव निवासी शीतल दास महंत ने बताया कि उनके पिता स्वर्गीय लतेल दास महंत ने वर्ष 1977 में कुण्डा क्षेत्र में करीब ढाई एकड़ कृषि भूमि खरीदी थी। परिवार का दावा है कि खरीद प्रक्रिया पूरी तरह वैधानिक थी और नामांतरण के बाद से लगातार उसी जमीन पर खेती की जा रही थी। वर्षों तक किसी प्रकार का विवाद सामने नहीं आया, लेकिन जब हाल ही में राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराई गई तो जमीन किसी और के नाम पर दर्ज मिली।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि वर्ष 2012-13 के दौरान हरिशचंद्र कुर्रे समेत कुछ लोगों ने कथित रूप से दस्तावेजों में हेरफेर कर जमीन अपने नाम दर्ज करा ली। इतना ही नहीं, विवादित भूमि के करीब 0.60 एकड़ हिस्से को आगे बेचने की भी बात सामने आई है। इस खुलासे के बाद परिवार सकते में है और खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके परिवार ने वर्षों तक मेहनत कर उस जमीन को संभाला, खेती की और आज अचानक उन्हें अपनी ही जमीन पर अधिकार साबित करने की नौबत आ गई। मामले की जानकारी मिलते ही परिवार ने दस्तावेज खंगालना शुरू किया और फिर पचपेड़ी थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
हालांकि पुलिस का कहना है कि मामला राजस्व और भूमि अभिलेख से जुड़ा हुआ है, इसलिए संबंधित पक्ष को न्यायालय में दावा पेश करने की सलाह दी गई है। दूसरी ओर गांव और आसपास के क्षेत्रों में इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर दशकों पुरानी जमीन का रिकॉर्ड बिना जानकारी के कैसे बदल गया।
पीड़ित परिवार ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते न्याय नहीं मिला, तो उनकी पुश्तैनी मेहनत और हक दोनों छिन जाएंगे।









