बिलासपुर के सीपत क्षेत्र में गौशाला और डॉग शेल्टर की स्थापना की मांग जोर पकड़ रही है। इस मुद्दे को लेकर नागरिकों का कहना है कि अब उन्हें एनटीपीसी से ही उम्मीद है। पढ़िए पूरी ख़बर …..
बिलासपुर के सीपत क्षेत्र में गौशाला और डॉग शेल्टर की स्थापना की मांग जोर पकड़ रही है। इस मुद्दे को लेकर नागरिकों का कहना है कि अब उन्हें एनटीपीसी से ही उम्मीद है। यह मांग मुख्य रूप से क्षेत्र में आवारा पशुओं, खासकर गायों और कुत्तों की बढ़ती समस्याओं के कारण उठी है।
गौशाला की आवश्यकता
नवंबर 2024 में, सीपत के झलमला गांव में बड़ी संख्या में गायों की मौत की खबर सामने आई थी।
अनापूर्ति की समस्या: ग्रामीणों के अनुसार, इन गायों को फसल से बचाने के लिए एक जगह इकट्ठा किया गया था, लेकिन उन्हें पर्याप्त चारा और पानी नहीं मिला।
प्रशासनिक लापरवाही: इस घटना ने पशुओं की देख-रेख के प्रति प्रशासनिक उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद ग्रामीणों में आक्रोश भी देखा गया था।
डॉग शेल्टर की मांग
आवारा कुत्तों के आतंक से परेशान लोगों ने डॉग शेल्टर की भी मांग की है।
खतरे: आवारा कुत्तों के काटने और अन्य दुर्घटनाओं की घटनाओं के कारण लोगों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: इस संदर्भ में, सुप्रीम कोर्ट ने भी अगस्त 2025 में आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया है, जिससे इस मांग को और बल मिला है।
एनटीपीसी से उम्मीद क्यों?
सीपत में मौजूद एनटीपीसी जैसे बड़े औद्योगिक संस्थान से लोग उम्मीद कर रहे हैं कि वह कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत इन समस्याओं का समाधान करे।
बड़ी परियोजना: एनटीपीसी ने सीपत में अपनी परियोजना के लिए हजारों एकड़ जमीन का उपयोग किया है।
पर्यावरणीय प्रभाव: कंपनी पर क्षेत्र में प्रदूषण फैलाने के आरोप भी लगते रहे हैं, ऐसे में सामाजिक कार्यों में योगदान की उम्मीद करना स्वाभाविक है।
आर्थिक सहयोग: एक बड़े संस्थान के रूप में, एनटीपीसी के पास इस तरह के शेल्टर के निर्माण और रखरखाव के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।




