जीआरपी थाना गोलीकांड की गूंज लखनऊ तक: पुलिस की बड़ी लापरवाही उजागर

18 घंटे तक दबाए रहे घटना, इंस्पेक्टर समेत 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड
मामला मीडिया में उजागर, बरेली से लखनऊ तक मचा हड़कंप
सत्यम गौड़। बरेली
संवाददाता बरेली। बरेली जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर स्थित जीआरपी थाने में 2 सितंबर की रात चली गोली की गूंज अब लखनऊ तक पहुंच चुकी है। थाने में पिस्टल चेक करते समय चली गोली से इंस्पेक्टर परवेज अली और एक सिपाही घायल हो गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी गंभीर घटना को थाना पुलिस ने 18 घंटे तक दबाए रखा। अगले दिन जब सीओ जीआरपी अनिल कुमार वर्मा बरेली आए, तब उन्हें इस गोलीकांड की जानकारी हुई।
मिडिया ने जब दिखाया तो बरेली से लखनऊ तक हड़कंप
मिडिया ने जब यह खबर सबसे पहले उजागर की, तब बरेली से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मच गया। जीआरपी पुलिस ने दो दिन तक मीडिया से मामला छिपाए रखा, लेकिन जब मामला दबा नहीं तो शहर कोतवाली पुलिस तक को जांच में उतरना पड़ा। गुरुवार शाम सीओ जीआरपी अनिल कुमार वर्मा ने थाने पहुंचकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और माना कि यह पुलिस की गंभीर लापरवाही है।
सीओ बोले- “इतनी बड़ी घटना मुझसे भी छिपाई गई”
सीओ अनिल कुमार वर्मा ने कहा-“थाने में गोली चलना बेहद गंभीर बात है। यह किसी की जान भी ले सकती थी। लेकिन यहां तो इतनी बड़ी घटना मुझसे भी छिपा दी गई। मुझे जानकारी अगले दिन दी गई, जबकि फौरन सूचना देनी चाहिए थी।” सीओ ने बताया कि 3 सितंबर को अपहरण का एक केस सुलझाने वे बरेली आए थे। उसी दौरान उन्हें इस गोलीकांड के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने तुरंत एसपी जीआरपी को रिपोर्ट भेजी। इसके बाद एसपी ने इंस्पेक्टर समेत 4 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर विभागीय जांच के आदेश दिए।
कैसे चली गोली-सीओ ने खोला पूरा घटनाक्रम
सीओ ने बताया कि 2 सितंबर की रात को दो सिपाहियों को ट्रेन स्कॉर्ट ड्यूटी के लिए पिस्टल और मैगजीन दी गई थी। चेकिंग के दौरान आरक्षी छोटू कुमार की पिस्टल की स्लाइड फंस गई। जैसे ही उसे ठीक करने की कोशिश की, अचानक गोली चल गई। इसी दौरान आरक्षी मनोज कुमार भी पिस्टल चेक कर रहा था। उसका हैमर चढ़ा था, जिसे उतारने की कोशिश में दूसरी पिस्टल से भी फायर हो गया। गोली सीधे इंस्पेक्टर परवेज अली और पास खड़े सिपाही को लगी। यह सब थाने के भीतर हुआ और मौजूद पुलिसकर्मियों ने ही लापरवाही बरती। यही वजह है कि इंस्पेक्टर परवेज अली समेत छोटू कुमार, मनोज कुमार और मोनू कुमार को तत्काल निलंबित किया गया।
18 घंटे तक दबाये रही घटना, अब गाजियाबाद से होगी जांच
सीओ ने माना कि घटना के बाद न सिर्फ पुलिस ने सूचना दबाई बल्कि जांच को भी भटकाने की कोशिश की गई। 2 सितंबर को रात 10 बजे गोली चली, लेकिन उन्हें अगले दिन शाम 4 बजे ही जानकारी दी गई। उन्होंने कहा-“इतनी बड़ी घटना को दबाना थाना पुलिस की सबसे बड़ी गलती है।” मामले की निष्पक्ष जांच के लिए अब गाजियाबाद के सीओ जीआरपी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। अगर जांच में और भी नाम सामने आते हैं तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी।
थाने में डेढ़ साल से खराब पड़े सीसीटीवी, सवालों के घेरे में सुरक्षा
जांच में खुलासा हुआ कि जीआरपी थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे डेढ़ साल से खराब पड़े हैं। सीओ ने कहा कि अगर कैमरे चलते तो पूरी घटना कैद हो जाती और जांच आसान हो जाती। अब सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े थाने में डेढ़ साल से कैमरे खराब होने की जानकारी किसी को क्यों नहीं दी गई?






