युवा कांग्रेस चुनाव में बड़ा दांव: देवेंद्र यादव ने शैलेंद्र बंजारे पर खेला भरोसा, बदले सियासी समीकरण…
रायपुर। छत्तीसगढ़ युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद के चुनाव ने अब पूरी तरह राजनीतिक रंग पकड़ लिया है। लंबे समय से चल रही चर्चाओं और बैठकों के बाद आखिरकार देवेंद्र यादव खेमे ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। संगठन की सबसे अहम कुर्सी के लिए बलौदाबाजार के युवा नेता शैलेंद्र बंजारे को उम्मीदवार बनाया गया है। नामांकन की अंतिम तारीख पर हुए इस फैसले ने चुनावी मुकाबले को और भी रोचक बना दिया है।
सूत्रों के अनुसार, देवेंद्र यादव अपने पक्ष में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं टी.एस. सिंहदेव और चरणदास महंत का समर्थन जुटाने में सफल रहे हैं। इन दोनों नेताओं के समर्थन से चुनावी तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का गुट अब तक अपने अधिकृत उम्मीदवार के नाम से पर्दा नहीं उठा पाया है, जिससे राजनीतिक हलकों में उत्सुकता बनी हुई है।
सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शैलेंद्र बंजारे को मैदान में उतारना केवल संगठनात्मक फैसला नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखकर उठाया गया कदम भी है। सतनामी समाज से आने वाले शैलेंद्र को उम्मीदवार बनाकर देवेंद्र यादव ने युवाओं के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक वर्गों तक अपनी पहुंच मजबूत करने का संदेश दिया है।
रेफरल में सबसे आगे निकले शैलेंद्र
युवा कांग्रेस के नियमों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष पद के उम्मीदवार के लिए निर्धारित संख्या में ब्लॉक और जिला पदाधिकारियों का समर्थन आवश्यक होता है। इसी प्रक्रिया में शैलेंद्र बंजारे सबसे मजबूत दावेदार बनकर सामने आए।
रेफरल की स्थिति:
– शैलेंद्र बंजारे: 317 रेफरल (सबसे अधिक)
– प्रशांत बोकड़े: 224 रेफरल
– अन्य दावेदारों में सोनू शर्मा, विनय शील, लोकेश वशिष्ठ और हनी बग्गा भी शामिल हैं।
कौन हैं शैलेंद्र बंजारे?
शैलेंद्र बंजारे वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य होने के साथ बलौदाबाजार युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष भी हैं। छात्र राजनीति से लेकर युवा कांग्रेस तक उनका सक्रिय राजनीतिक सफर रहा है। संगठन में उनकी मजबूत पकड़ और जमीनी सक्रियता को देखते हुए देवेंद्र यादव खेमे ने कई अन्य दावेदारों के बजाय उनके नाम पर अंतिम सहमति बनाई।
अब सबकी नजर चुनावी नतीजों पर है। यह मुकाबला केवल प्रदेश अध्यक्ष चुनने तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे कांग्रेस के भीतर भविष्य की राजनीतिक ताकत और नेतृत्व की दिशा तय करने वाला चुनाव भी माना जा रहा है।













