🔥 “विकास या बदले की राजनीति?”बजट पर फूटा कांग्रेस का गुस्सा, अरुण मालाकार बोले – सारंगढ़ को मिल रही सियासी सजा..
सारंगढ़। छत्तीसगढ़ की सियासत में बजट को लेकर हलचल तेज हो गई है। राज्य सरकार द्वारा पेश किए गए ताजा बजट पर कांग्रेस नेताओं ने सीधा हमला बोल दिया है। जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अरुण मालाकार ने सरकार की नीतियों को आम जनता के खिलाफ बताते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
मालाकार का कहना है कि बजट में बड़े उद्योगों और कॉर्पोरेट घरानों के लिए रास्ते आसान किए गए हैं, जबकि किसान, मजदूर, युवा और छोटे जिलों की जरूरतों को नजरअंदाज किया गया है। उनके अनुसार यह बजट “जमीन से कटा हुआ दस्तावेज” है, जिसमें आंकड़ों की चमक तो है, लेकिन राहत की ठोस योजना नहीं।
📚 शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि प्रदेश में हजारों शिक्षकों के पद रिक्त हैं, जिससे सरकारी स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। छात्रवृत्ति वितरण और स्कूलों के संचालन को लेकर भी उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।
उनका कहना है कि शिक्षा सुधार के बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्कूल संसाधनों और स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं।
🏥 स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक?
मालाकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि कई अस्पतालों में पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं। सरकारी योजनाओं के भुगतान में देरी से मरीजों को निजी अस्पतालों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए घोषित प्रावधान धरातल पर असरदार साबित नहीं हो रहे।
⚖️ सारंगढ़-बिलाईगढ़ को क्यों नहीं मिली प्राथमिकता?
जिले की उपेक्षा का मुद्दा उठाते हुए मालाकार ने कहा कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ को अपेक्षित बजटीय महत्व नहीं दिया गया। उन्होंने इसे राजनीतिक भेदभाव से जोड़ते हुए कहा कि विपक्षी विधायकों वाले क्षेत्रों के साथ सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है।
उनके शब्दों में —
“यह बजट जनता की उम्मीदों का जवाब नहीं, बल्कि आंकड़ों की कलाबाजी है। आम आदमी को राहत नहीं, सिर्फ आश्वासन मिला है।”
🔎 अब आगे क्या?
बजट को लेकर शुरू हुई यह सियासी जंग आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। जनता की नजर अब इस बात पर है कि घोषणाएं धरातल पर कितनी उतरती हैं।









