आरक्षकों की पदोन्नति पर हाईकोर्ट का बड़ा ब्रेक! अब अगली सुनवाई तक नहीं मिलेगा प्रमोशन आदेश…
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में आरक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि फिलहाल किसी भी आरक्षक का अंतिम पदोन्नति आदेश जारी नहीं किया जाएगा। इस फैसले के बाद पुलिस विभाग में चल रही पदोन्नति प्रक्रिया पर अस्थायी रोक लग गई है।
मामले की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने कहा कि विभागीय प्रक्रिया जारी रखी जा सकती है, लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी कर्मचारी को प्रमोशन देने का अंतिम आदेश जारी नहीं होगा।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता सुरेंद्र कुमार देशमुख ने वरिष्ठता सूची को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनका कहना है कि जिन आरक्षकों ने स्वयं के अनुरोध पर दूसरे जिले में तबादला कराया, उन्हें नियमों के अनुसार नई जगह की वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे रखा जाना चाहिए।
याचिका में आरोप लगाया गया कि विभाग कुछ मामलों में इस नियम का पालन नहीं कर रहा है। ऐसे कर्मचारियों की वरिष्ठता उनके नए जिले में आने की तारीख से तय करने के बजाय उनकी मूल नियुक्ति तिथि से जोड़ी जा रही है, जिससे पदोन्नति में अन्य कर्मचारियों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान अदालत ने ‘छत्तीसगढ़ पुलिस कार्यपालिक बल, आरक्षक भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा की शर्तें नियम, 2007’ के संबंधित प्रावधानों का अवलोकन किया। इसके बाद कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि:
विभागीय पदोन्नति प्रक्रिया जारी रह सकती है।
लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी आरक्षक का अंतिम प्रमोशन आदेश जारी नहीं किया जाएगा।
सभी पक्षकारों को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
अब आगे क्या होगा?
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद पुलिस विभाग की निगाहें अगली सुनवाई पर टिक गई हैं। यदि अदालत वरिष्ठता नियमों की व्याख्या पर अंतिम फैसला देती है, तो इसका असर राज्यभर में बड़ी संख्या में आरक्षकों की पदोन्नति और वरिष्ठता सूची पर पड़ सकता है।













