श्रीराम मूर्ति मेडिकल कॉलेज में रैगिंग से परेशान MD छात्र तीसरी मंजिल से कूदा, सीनियर डॉक्टरों पर एफआईआर, जानें मामला…
सत्यम गौड़। बरेली
श्रीराम मूर्ति मेडिकल कॉलेज में एमडी मेडिसिन प्रथम वर्ष के छात्र ने सीनियरों की रैगिंग से परेशान होकर तीसरी मंजिल से छलांग लग दी। जिसमें वह गंभीर रुप से घायल हो गया, जिससे वह कई दिन आईसीयू में भर्ती रहा। अब पीड़ित के पिता ने भोजीपुरा थाने में आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
बिजनौर के बुडगरा, किरतपुर निवासी सुधीर पाराशन ने भोजीपुरा पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उन्होंने अपने बेटे आशु पाराशर को श्री राम मूर्ति मेडिकल कॉलेज में एमडी मेडिसिन में प्रवेश कराया था। प्रवेश के बाद से ही सीनियर छात्रों ने आशु का मानसिक उत्पीड़न शुरू कर दिया था। आरोप है कि ड्यूटी के दौरान उसके साथ गाली-गलौज और अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। ड्यूटी खत्म होने के बाद भी उसे घंटों रोककर निजी कार्य कराते थे।
रविवार को भी बुलाते थे, रात में मैसेज कर करते थे परेशान
पीड़ित के पिता ने बताया कि सीनियर छात्र देर रात उसे मैसेज कर परेशान करते थे और रविवार और अवकाश के दिनों में भी जबरन ड्यूटी पर बुला लेते थे। उन्होंने बताया कि उनके बेटे के पैरों में घाव होने के बावजूद भी उसे जूते नहीं बदलने दिये और कई बार लगातार 40-40 घंटे तक बिना आराम के काम कराया। परिजनों का कहना है कि आशु ने अपनी परेशानी मेडिसिन विभाग की एचओडी डॉ. स्मिता गुप्ता को बताई, लेकिन उन्होंने उसे दूसरे डॉक्टर के पास भेज दिया। मामले में कोई ठोस कार्रवाई न होने की वजह से लगातार बढ़ते मानसिक दबाव के कारण वह अवसाद में चला गया।
तीसरी मंजिल से कूदा, कई दिनों तक ICU में रहा भर्ती
सुधीर ने बताया कि मानसिक प्रताड़ना और रैगिंग से परेशान होकर उसने 2 मई को मेडिकल कॉलेज की तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी। गंभीर चोटों के बाद उसे अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया। पीड़ित के पिता ने डॉ. रितेश गोयल, डॉ. कुशाग्र शर्मा, डॉ. मानस खंडेलवाल, डॉ. लतिका व अन्य कई छात्रों के साथ कॉलेज प्रशासन के खिलाफ भोजीपुरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
कॉलेज प्रबंधन पर भी उठे सवाल
परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद भी कॉलेज प्रशासन ने आरोपी सीनियर छात्रों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। 5 मई को प्रधानाचार्य और कॉलेज प्रबंधन को रजिस्ट्री के माध्यम से शिकायत भेजी गई, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 13 मई को आशु का मेडिकल परीक्षण सीएचसी नजीबाबाद में कराया गया, जहां से उसे जिला अस्पताल बिजनौर रेफर किया गया। पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी छात्रों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।









