दो जिले बीच पहाड़ों में महायज्ञ मेंआहुतियां।विश्व कल्याणकारी और शांति स्थापना की कामना।…
आवाम की आवाज /खाचरोद /कमलेश पाटीदार
21 से शुरुआत हुई आहुतियां की पूर्णाहुति 26 मई को हुई।
पहाड़ों पर आरतीयों की गुंजायमान ने पुरा वातावरण आनंदित कर दिया।…
पहाड़ों में पूर्ण होती है मनो कामनाएं मनकामेश्वर महादेव से। औषधीयों से भरे पहाड़ी पत्थरों से आती है घंटियों की आवाज़।
दो जिलों के सीमावर्ती क्षेत्र में वर्षा पूराना शिवलींग।
।।”कामना हृदय की सुना के देख लें, दुख भंजन दुर करेंगे शरण आकर देख ले”।।
खाचरोद , जी हां हम बात कर रहे दो जिलो के मध्य उज्जैन और रतलाम के पहाड़ों पर मनकामेश्वर मंदिर में गुंजायमान ऊं नमः शिवाय के मंत्र जाप की, जो वर्षों बरस चमत्कारी मनकामेश्वर महादेव शिवलिंग से आती है, यह मंदिर उज्जैन जिला के कमठाना और रतलाम जिला के कमेड़ गांव के मध्य पहाड़ों में स्थित है, पहाड़ी क्षेत्र 10 से 12 किलोमीटर मगरा फैला हुआ है, यहां के पहाड़ों में आयुर्वेदिक औषधीया भी पाई जाती है, बाहरी जानकार लोग आते हैं अपने पहचान और काम की जड़ी बूटियों को खोजकर लै जाते हैं,
मनकामेश्वर महादेव के बारे बतातें है सदियो पहले पहाड़ों-जंगलों में गाय भैंस बकरीया चराने वाले को शिवलिंग दिखाई दिया, वहां के पत्थरों से घंटीयो की आवाज़ आने लगी, तो चारवाहों ने वही पर उनका छोटा मंदिर बना दिया और जानवरों व प्राकृतिक आपदाओं से खेती-बाड़ी की सुरक्षा और निसंतान के लिए शिवलिंग से कामना करते जो उनकी कामनाएं पूर्ण करने लगे, धिरे-धिरे ग्रामीण जनों की आस्था का केंद्र बन गया, यहां के पत्थरों से घंटीयो की आवाज़ आती है। कमठाना के ग्रामीणजन प्रतिवर्ष यहां पर गंगा दशमी पर पंच दिवसीय धुमधाम से हवन पूजन अभिषेक करते है, सावन मास में मनकामेश्वर शिवलिंग का जलाभिषेक के लिए आसपास के ग्रामीणजन महिला पुरुषों का मैला सा लगता है,
पूर्ण होती रही मनोकामनाएं ओर आस्था बढ़ती गई, निसंतान को संतान प्राप्ति हुई, बारीस में पानी की कमी को पुरा किया, ग्रामीण क्षेत्रों की हर दुख दर्द, जान-माल व फसलों की सुरक्षा का केंद्र मनकामेश्वर महादेव ही है
संवाददाता द्वारा पहाड़ी क्षेत्र व मंदिर की जानकारी लेने पर ग्रामीणों ने बताया कि 10 से 12 गांवों को जोड़ने वाले पहाड़ी क्षेत्र में आकाशीय बीजली का भी कनेक्शन है वह पत्थर भी मंदिर के पिछे है जीस पर आकाशीय बीजलीया गिरी थी लेकिन वापस नहीं गयी। सरकार को चाहिए की इंदौर की दोमट गिरी की तर्ज पर विशाल वृक्षारोपण कर औषधीय भरे पहाड़ी क्षेत्र का संरक्षण करने के लिए बड़ा कदम उठाना चाहिए, यहां के अतिक्रमण को हटाया जाए जीससे आने वाली पिढीयो के लिए प्रकृति के बीच धार्मिक रमणीय स्थल और पर्यावरण सुरक्षा में एक महत्वपूर्ण बढ़ा कदम होगा। जहां विकास के नाम पर जंगलों के पेड़ लगातार कम होते जा रहे हैं, और नए रास्ते की भेट चढ़ रहें हैं, लेकिन जलवायु स़तुलन नही किया तो कल भयावह स्थिति पर्यावरण को सामने खड़ी रहैगी, जहां ना धर्म होगा और ना पेड़ पोधे होगे- सिर्फ पैसौं से आक्सीजन खरीदने को मजबुर होंगे। सरकार को जो है उसे बचाने में कठोर निर्णय लेना चाहिए।
महायज्ञ की पूर्णाहुति में हजारों की संख्या में भक्त गण प्रकृति के बीच स्थित पहाड़ों में मनकामेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे और महायज्ञ की पूर्णाहुति का लाभ लीया









