मौत भी जुदा न कर सकी…” — मां ने आखिरी सांस तक बेटे को सीने से लगाए रखा, बरगी हादसे की सबसे दर्दनाक कहानी
आवाम की आवाज़ न्यूज़// भुनेश्वर निराला
मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी बांध पर 30 अप्रैल की शाम जो हुआ, उसने सिर्फ जानें नहीं लीं… बल्कि रिश्तों, उम्मीदों और खुशियों को एक ही पल में तोड़ दिया।
लेकिन इस हादसे से जो एक तस्वीर और कहानी सामने आई, उसने पूरे देश को भीतर तक हिला दिया।
मां-बेटे को मौत भी अलग नहीं कर सकी
जब रेस्क्यू टीम ने पानी से शव निकाले, तो एक दृश्य ऐसा था जिसे देखकर हर आंख नम हो गई—
एक मां अपने छोटे बेटे को सीने से कसकर लगाए हुई थी
बताया जा रहा है कि:
मां ने अपने 4 साल के बेटे को लाइफ जैकेट में लपेट रखा था
आखिरी सांस तक उसे अपने शरीर से अलग नहीं होने दिया
ऐसा लग रहा था जैसे वह मौत से भी लड़ रही हो… सिर्फ अपने बच्चे के लिए।

कुछ मिनटों में खुशियां बनी मातम
उस दिन नर्मदा किनारे छुट्टियां मना रहे परिवारों को क्या पता था कि अगला पल उनकी जिंदगी बदल देगा।
तेज आंधी
ऊंची लहरें
और अचानक पलटता क्रूज़
चीखें, भगदड़, टूटी खिड़कियां… और पानी में डूबती उम्मीदें।
“बोट किनारे लगा दो…” लेकिन किसी ने नहीं सुनी
हादसे से बची बेटी ने जो बताया, वह और भी चौंकाने वाला है—
यात्रियों ने बार-बार कहा: “किनारे चलो, मौसम खराब है…”
लेकिन उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया गया
कुछ ही देर में हालात काबू से बाहर हो गए।
लाइफ जैकेट तक समय पर नहीं मिली
बेटी के मुताबिक:
लाइफ जैकेट समय पर नहीं बांटी गई
लोगों ने खुद कैबिनेट तोड़कर जैकेट निकाली
यानी खतरा सामने था… लेकिन तैयारी नहीं। एक परिवार… जो छुट्टियों पर आया था
दिल्ली से आया परिवार:
गृह प्रवेश का कार्यक्रम
गर्मियों की छुट्टियां
साथ बिताने के पल
लेकिन बरगी का पानी उनके लिए कब्र बन गया
बेटी की आंखों के सामने बिखर गया सब कुछ
बेटी किसी तरह बच निकली…
पिता का हाथ पकड़ा… बाहर आ गई…
लेकिन मां और छोटा भाई… हमेशा के लिए छूट गए
अगले दिन तक वह उम्मीद लगाए बैठी रही—
“शायद कोई चमत्कार हो जाए…”
लेकिन जब सच सामने आया… तो उसकी दुनिया टूट गई।

यह सिर्फ हादसा नहीं… सवाल है
आज जांच चल रही है—
ओवरलोडिंग?
मौसम चेतावनी की अनदेखी?
सुरक्षा में लापरवाही?
लेकिन इन सबके बीच सबसे बड़ी कहानी है—
एक मां की, जिसने आखिरी सांस तक अपने बच्चे को बचाने की कोशिश की।
एक सच्चाई जो दिल चीर देती है
कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिन्हें मौत भी नहीं तोड़ पाती…
यह कहानी उसी ममता की है… जो आखिरी पल तक जिंदा रही।
यह खबर पढ़कर भूलना मुश्किल है… क्योंकि यह सिर्फ खबर नहीं, एक एहसास है।










